मोदी नीतीश की जोड़ी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Nitish Modi Strategy In Bihar Election: बिहार चुनाव 2025 के रुझानों ने पूरे राज्य का राजनीतिक माहौल हिला दिया है। NDA ने वह बढ़त हासिल कर ली है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। दोपहर तक आते-आते 200+ सीटों के संकेत मिलने लगे और यह साफ हो गया कि इस बार मुकाबला एकतरफा है। सोशल मीडिया और टीवी डिबेट्स में महागठबंधन की चर्चा थी, लेकिन असल चुनावी पिच पर गेम पूरी तरह पलट गया।
चुनाव से पहले तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर को युवा चेहरा बनाकर बड़ी उम्मीदें जताई जा रही थीं। उनके रोड शो की भीड़, वायरल वीडियो और सोशल मीडिया की लहर ने माहौल जरूर बनाया। लेकिन यह लहर ग्राउंड रियलिटी से मेल नहीं खाई। टीवी और X पर पैदा हुआ नैरेटिव बिहार की धरती पर टिक नहीं सका। चुनाव के दिन जनता ने बिल्कुल अलग मूड दिखाया।
दूसरी तरफ, बीजेपी और जेडीयू ने शांत रहकर रणनीति बनाई। न बड़े शो, न ज्यादा शोर बस माइक्रो मैनेजमेंट पर फोकस। बूथ लेवल तैयारी, महिला वोटरों पर फोकस, और सामाजिक समीकरणों पर सर्जिकल प्लानिंग ने चुपचाप NDA की जीत की नींव रख दी। नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने अपने भाषणों और संदेशों को सटीक तरीके से सही वर्ग तक पहुंचाया। यह रणनीति क्रिकेट की उस कहानी जैसी लगी, जहां रोहित शर्मा और विराट कोहली को ‘चुका हुआ’ कहा गया था, लेकिन उन्होंने बड़े मंच पर अपनी क्लास दिखा दी।
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बिहार की राजनीति में भी वही दृश्य दोहराया गया। तेजस्वी और पीके को लेकर जो उत्साह ऑनलाइन दिखा, वह वोट में तब्दील नहीं हुआ। महागठबंधन ने मान लिया था कि हवा उनके पक्ष में है। पर जमीन पर उनका संगठन मजबूत नहीं दिखा। कई सीटों पर उनके दिग्गज उम्मीदवारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
वहीं NDA ने जातीय समीकरण को बारीकी से साधा। EBC, OBC, SC और ST वर्ग में मजबूती से पैठ बनाई। खासकर JDU ने महिला वोटरों को अपने पाले में रखकर महत्वपूर्ण बढ़त हासिल की। केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने गांव-गांव असर दिखाया। यही कारण है कि शहरी भीड़ और डिजिटल चर्चा के बावजूद अंतिम फैसला NDA के पक्ष में गया।
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बिहार के वोटरों ने एक बार फिर साबित किया कि सोशल मीडिया की आवाज चुनावी मैदान में निर्णायक नहीं होती। जनता ने अपने स्थानीय मुद्दों, स्थिरता और काम को प्राथमिकता दी। NDA की जीत सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि नैरेटिव की भी जीत है।