लैंड फॉर जॉब केस : लालू यादव और परिवार की दिल्ली के कोर्ट में कल पेशी, तेज प्रताप की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
लैंड फॉर जॉब मामले में सबसे खास बात यह है कि लालू यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को पहली बार समन भेजा गया है। ऐसे में तेज प्रताप की मुश्किलें भी बढ़ने की संभावना है।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
Land for Job Case | X
पटना : राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव आज शाम दिल्ली के लिए रवाना हों रहे हैं। बता दें लैंड फॉर जॉब घोटाले में 7 अक्टूबर यानी कल दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में लालू यादव की पेशी होनी है।
लैंड फॉर जॉब केस में उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव के साथ आठ अन्य आरोपियों को भी कोर्ट में पेश होना है। लालू यादव के साथ उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती भी दिल्ली जा रही हैं। तेज प्रताप यादव पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं, जबकि तेजस्वी यादव के दुबई से आज रात तक दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।
पटना से दिल्ली के लिए रवाना हुए लालू यादव, देखें वीडियो
#WATCH | Bihar | RJD chief Lalu Prasad Yadav leaves from Patna, for Delhi. On exit polls, Lalu Prasad Yadav says, “It is the defeat of PM Narendra Modi.” pic.twitter.com/c0H1Q0a1ca — ANI (@ANI) October 6, 2024
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लैंड फॉर जॉब मामले में सबसे खास बात यह है कि लालू यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को पहली बार समन भेजा गया है। ऐसे में तेज प्रताप की मुश्किलें भी बढ़ने की संभावना है। केस में शामिल अन्य प्रमुख आरोपियों में अखिलेश्वर सिंह, हजारी प्रसाद राय, संजय राय, धर्मेंद्र सिंह, और किरण देवी का भी नाम शामिल है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने रेलवे में ग्रुप डी की नौकरियां देने के बदले जमीन का सौदा किया। इस घोटाले में कुल 11 लोग आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से तीन की मृत्यु हो चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने इस मामले की जांच करते हुए पाया कि नौकरी के बदले जो जमीन ली गई थी, वह अब भी लालू परिवार के कब्जे में है।
ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट के अनुसार, मेसर्स ए.के. इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य कंपनियों का इस्तेमाल करके भूमि अधिग्रहण और नौकरी के बीच के संबंध को और अधिक जटिल बनाया गया। इसके पीछे मुख्य साजिशकर्ता के रूप में लालू प्रसाद यादव को चिन्हित किया गया है। ईडी ने दावा किया है कि इन संस्थाओं का उपयोग घोटाले को छिपाने के लिए किया गया था।
इस केस की वजह से लालू यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तेज प्रताप यादव को पहली बार समन जारी होने के बाद उनका नाम भी सीधे तौर पर घोटाले में आ गया है। 7 अक्टूबर को कोर्ट की सुनवाई में क्या नया मोड़ आएगा, यह तो सुनवाई के बाद ही पता चलेगा।
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