
दही चूड़ा पार्टी में लालू यादव, फोटो- सोशल मीडिया
Lalu Yadav Dahi Chooda Party: पटना में मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित होने वाला लालू-राबड़ी आवास का पारंपरिक दही-चूड़ा भोज इस बार राजनीतिक अनिश्चितता के साये में है। आरजेडी की चुनावी हार और लालू-तेजस्वी की अनुपस्थिति के बीच, तेज प्रताप यादव ने अपना अलग आयोजन कर सत्ता पक्ष के दिग्गजों को न्योता भेज दिया है।
पटना में हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर लालू-राबड़ी आवास पर भव्य दही-चूड़ा भोज का आयोजन एक राजनीतिक परंपरा रही है, लेकिन इस बार इस पर सियासी सस्पेंस गहरा गया है। सूत्रों के अनुसार, हालिया विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को मिली करारी हार के बाद से पार्टी और परिवार के भीतर माहौल बदला हुआ है।
वर्तमान में, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपनी आंख की सर्जरी के बाद दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी फिलहाल पटना में मौजूद नहीं हैं और छुट्टियों पर गए हुए हैं। इन परिस्थितियों के कारण, इस वर्ष के आधिकारिक आयोजन को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जहां एक तरफ लालू आवास पर खामोशी है, वहीं लालू के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने अपना अलग मकर संक्रांति भोज आयोजित कर सियासी पारा बढ़ा दिया है। तेज प्रताप ने आगामी 14 जनवरी को अपने 26 एम स्टैंड रोड स्थित आवास पर इस भोज का ऐलान किया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस आयोजन के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, महामहिम राज्यपाल और राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्रियों (सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा) को भी आमंत्रित करने की तैयारी की है। तेज प्रताप का तर्क है कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जिसमें सभी वर्गों और विचारधाराओं के लोगों का स्वागत है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या यह आयोजन परिवार और पार्टी के भीतर तेज प्रताप यादव की वापसी का जरिया बनेगा। गौर करने वाली बात यह है कि तेज प्रताप ने स्पष्ट किया है कि वे अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी औपचारिक रूप से इस भोज के लिए आमंत्रित करेंगे।
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यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तेज प्रताप पिछले कुछ समय से पार्टी और परिवार में हाशिए पर चल रहे थे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 14 जनवरी को पटना की सड़कों पर सत्ता और विपक्ष के नेता एक ही थाली से दही-चूड़ा खाते नजर आएंगे या यह आयोजन आरजेडी के भीतर किसी नई सियासी खींचतान का संकेत देगा।






