राज्यसभा सीट को लेकर जीतन राम मांझी हुए बागी! बोले- हमारा हक नहीं मिला तो छोड़ देंगे NDA

Bihar Politics: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर हमें हमारा हक नहीं मिला, तो हमें अपना रास्ता खुद बनाना होगा। मंत्री पद मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है।
Jitan Ram Manjhi
जीतन राम मांझी
Updated on

Jitan Ram Manjhi's Statement on Rajya Sabha Seat: केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी के लिए एक सीट की मांग की है। गया में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वे देख रहे हैं कि खबरों में कहा जा रहा है कि जेडीयू को दो राज्यसभा सीटें, बीजेपी को दो और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को एक सीट दी जा रही है। लेकिन, उन्होंने सवाल उठाया, "तो हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) कहां है?"

राज्यसभा सीट को लेकर अपनी मांग रखी

जीतन राम मांझी ने आगे कहा कि 2024 के चुनावों में उन्हें दो लोकसभा सीटों और एक राज्यसभा सीट का वादा किया गया था। उस समय, उन्हें एक लोकसभा सीट दी गई, जिसे उन्होंने जीता। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया, क्योंकि उन्हें मंत्री बनाने का मौका मिला। लेकिन, उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा सीट अभी भी बकाया है। अप्रैल में होने वाले राज्यसभा चुनावों के दौरान, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को एक सीट मिलनी चाहिए, यह उनकी प्रमुख मांग है।

"मंत्री पद कोई बड़ी बात नहीं"

जीतन राम मांझी ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्री पद उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। उनका कहना था, "अगर हमें हमारा हक नहीं मिला, तो हमें अपना रास्ता खुद बनाना होगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में नहीं रहे, तो भी उनका राजनीतिक अस्तित्व कायम रहेगा। उन्होंने अपनी बातों को और भी स्पष्ट करते हुए कहा कि मंत्री पद से उनका कोई व्यक्तिगत जुड़ाव नहीं है और वे पार्टी के लिए काम करने में विश्वास रखते हैं।

पार्टी संरक्षक के रूप में भूमिका

जीतन राम मांझी ने यह भी कहा कि वे केवल पार्टी के संरक्षक हैं और अंतिम निर्णय पार्टी के पदाधिकारी लेंगे। हालांकि, उन्होंने अपनी बात पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने मजबूती से रखी है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो उन्हें अपने राजनीतिक विकल्पों पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।

मांझी ने मीडिया से अनुरोध किया कि उनकी बातों को संदर्भ से बाहर लेकर न तोड़ा-मोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि वे अपनी पार्टी का कोई भी फैसला नहीं ले सकते, क्योंकि वे उसके पदाधिकारी नहीं, बल्कि केवल संरक्षक हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर उनकी पार्टी को उनका हक नहीं मिला, तो उन्हें अपने राजनीतिक विकल्पों पर पुनः विचार करना होगा।

Navbharat Live
navbharatlive.com