सूखाग्रस्त विदर्भ के साथ अन्याय का आरोप, वैनगंगा-नलगंगा प्रोजेक्ट के दस्तावेजों में बदलाव की आशंका

Wainganga-Nalganaga Project को लेकर जल विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण महाजन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दस्तावेजों में बदलाव और पानी के असमान वितरण का आरोप लगाया है।
Wainganga Nalganga irrigation project
वैनगंगा नल गंगा सिंचाई परियोजना (सौ. सोशल मीडिया )
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Vidarbha Drought Water Allocation Issue: राज्य सरकार की प्रस्तावित वैनगंगा-नलगंगा परियोजना पर अब सवाल उठने लगे हैं। जल विशेषज्ञ डॉ प्रवीण महाजन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर परियोजना के मूल दस्तावेजों में बदलाव की आशंका जताई है। उन्होंने सूखाग्रस्त क्षेत्रों के हितों की रक्षा करने और पानी के न्यायसंगत वितरण की मांग की है।

पानी वितरण में असमानता का आरोप

डॉ महाजन के अनुसार गोसीखुर्द राष्ट्रीय परियोजना से नलगंगा परियोजना तक पानी पहुंचाने की योजना में पहले चरण में जरूरत से ज्यादा, लगभग 836 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी आवंटित किया गया है। जबकि दूसरे और तीसरे चरण में सूखा प्रभावित क्षेत्रों को अपेक्षाकृत कम पानी मिलने की बात सामने आई है। इस असमानता को लेकर उन्होंने पुनर्विचार की मांग की है।

विदर्भ के सूखाग्रस्त जिलों की चिंता

वैनगंगा-नलगंगा परियोजना का मूल उद्देश्य पश्चिम विदर्भ के नागपुर, वर्धा, यवतमाल, अमरावती, वाशिम, अकोला और बुलढाणा जिलों में सिंचाई की कमी और बैकलॉग को दूर करना था। लेकिन कथित बदलावों के चलते आशंका जताई जा रही है कि इन सूखा प्रभावित और किसान आत्महत्या से प्रभावित इलाकों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा।

निष्पक्ष समीक्षा की मांग

जल विशेषज्ञ ने मुख्यमंत्री से परियोजना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी बदलाव से पहले सूखाग्रस्त क्षेत्रों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों का क्या समाधान निकलता है।

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