
बिहार विधानसभा। इमेज-सोशल मीडिया
Bihar Legislative Assembly: बिहार विधानसभा के गलियारों में हलचल तेज है। नई सरकार में स्पीकर पद को लेकर नेताओं के बीच चर्चा जारी है। गयाजी से नौ बार विधायक और कई बार मंत्री रह चुके प्रेम कुमार स्पीकर के लिए प्रमुख दावेदार माने जा रहे। जदयू के तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा ने स्पीकर पद नहीं छोड़ा है।
बहरहाल, लोगों के मन में सवाल है कि स्पीकर का चयन कैसे होता है? आम लोग वोट करते हैं या उनके द्वारा निर्वाचित विधायक। ऐसे हम इस आर्टिकल में इन सवालों का जवाब दे रहे हैं।
विधानसभा के सदस्यों द्वारा स्पीकर का चयन किया जाता है। इसमें सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। कोई भी निर्वाचित सदस्य स्पीकर पद के लिए नामांकित हो सकता है। वैसे, केवल वोटिंग ही निर्णायक नहीं होती है। राजनीतिक दल अपने अनुभव, वरिष्ठता, कार्यकुशलता, विधायी समझ को ध्यान में रखकर उम्मीदवार का चयन करते हैं। आमतौर पर जिस नेता के पास लंबा अनुभव और कार्यपालिका में योगदान होता है, उसे पार्टी या गठबंधन द्वारा प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा राजनीतिक संतुलन और सदन में समर्थन की संख्या भी चुनाव में अहम भूमिका निभाती है। मतलब अनुभव और वोट मिलकर तय करते हैं कि कौन स्पीकर बनेगा।
राज्य में स्पीकर का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है। ये विधानसभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं। कानून के मसलों पर निर्णय लेते और सदन में अनुशासन बनाए रखते हैं। इस कारण राजनीतिक दल हमेशा इस पद के लिए सबसे अनुभवी और भरोसेमंद नेता को चुनने का प्रयास करते हैं।
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स्पीकर पद के लिए प्रेम कुमार के नाम को लेकर चर्चा तेज है, क्योंकि उनके पास विधानसभा और मंत्री के रूप में लंबा अनुभव है। उन्होंने कई संवेदनशील मामलों को संभालने का काम भी किया है। इस बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्पीकर का चयन सिर्फ अनुभव या वरिष्ठता तक सीमित नहीं रहेगा। सदन में गठबंधन और दलों के बीच संतुलन को ध्यान में रखा जाएगा। प्रेम कुमार निर्विवादित हैं। इन पर भ्रष्टाचार का भी आरोप नहीं लगा है। भाजपा के बहुत पुराने नेता और हर परिस्थिति में पार्टी से जुड़े रहे हैं।






