
बिहार के सीएम और जदयू नेता नीतीश कुमार। इमेज-सोशल मीडिया
Bihar Election Results 2025 NDA: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण का मतदान समाप्त होने के साथ 17 एजेंसियों के एग्जिट पोल में एनडीए को बहुमत दिया गया है। इसके बाद एनडीए के तमाम नेता अपने जीत की संभावनाओं को और मजबूती से रख रहे हैं। हालांकि, बिहार में एनडीए ने और खासकर जदयू ने 2010 के विधानसभा में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। 6 चरण में हुए उस चुनाव में भाजपा और जदयू मिलकर चुनाव लड़े थे। वहीं, राजद और लोजपा एक साथ और कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ी थी।
एनडीए ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। जदयू ने 141 सीटों में से 115 सीटें जीत दर्ज की थी। इसी के साथ वह प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी। भाजपा ने 102 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। पार्टी को 91 सीटों पर जीत मिली थी। राजद 168 सीटों पर लड़ा था, लेकिन 22 सीटें ही सका था। यह आंकड़ा फरवरी 2005 के चुनावों में मिली 75 सीटों के मुकाबले बेहद खराब था। लोजपा ने 75 सीटों पर लड़कर सिर्फ 3 सीटें जीती थीं। कांग्रेस सभी 243 सीटों पर प्रत्याशी उतारी और सिर्फ 4 सीटों पर संतोष करना पड़ा था।
उस चुनाव में नीतीश ने नेतृत्व कौशल और सुशासन के एजेंडे को सामने रखा। सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति और महिला सशक्तीकरण जैसे उनके काम को जनता ने सराहा। भाजपा के साथ उनकी गठबंधन रणनीति ने चुनावी मैदान में एनडीए को मजबूती प्रदान की।
एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद नीतीश को फिर मुख्यमंत्री बनाया गया। दरअसल, एनडीए के विकास और सुशासन के एजेंडे ने जातीय समीकरणों और पारंपरिक राजनीति को पीछे छोड़ा था। वह चुनाव राज्य में नीतीश की मजबूत पकड़ और राजद का गिरता प्रभाव माना गया।
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साल 2010 के चुनाव ने राजद के प्रभाव को करीब-करीब खत्म कर दिया। पूर्व सीएम लालू यादव की पार्टी कभी बिहार की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत थी। वह 22 सीटों पर सिमटी। दशकों तक देश और बिहार पर राज करने वाली कांग्रेस को केवल 4 सीटों पर जीत मिली। यह हार कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक झटका साबित हुई। इसके बाद कांग्रेस ने साल 2015 और साल 2020 में महागठबंधन का हिस्सा बनकर चुनाव लड़ा।






