

Bihar Election Yogi Strategy: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की तस्वीर अब लगभग साफ होती नजर आ रही है। नवीनतम रुझानों के अनुसार राज्य में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है। बीजेपी और जेडीयू को मिलकर प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है, जबकि महागठबंधन मात्र कुछ दर्जन सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। एनडीए 200 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे साफ है कि जनता ने एक बार फिर इस गठबंधन पर भरोसा जताया है।
इस चुनाव में बीजेपी ने पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरते हुए बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाया। स्टार कैंपेनर्स में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी प्रमुख चेहरा रहे, जिन्होंने बिहार के कई महत्वपूर्ण इलाकों में बीजेपी प्रत्याशियों के पक्ष में रैलियां कीं। अब जब चुनावी रुझान सामने आ रहे हैं, तो स्पष्ट दिख रहा है कि योगी आदित्यनाथ की रैलियों ने बीजेपी के पक्ष में बड़ा माहौल तैयार किया।
योगी आदित्यनाथ ने बिहार के जिन क्षेत्रों में प्रचार किया था, उनमें गया, बेतिया, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, दानापुर, पटना, सहरसा, रघुनाथपुर, सिवान, शाहपुर, बक्सर, लालगंज, अगियाव, केवाटी, छपरा, नागर, मुजफ्फरपुर, गरखा, दिघा, दरभंगा, मोहिबुद्दीन नगर, लखीसराय, बख्तियारपुर और गोपालगंज जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ये कुल 136 सीटें बनती हैं यह संख्या विधानसभा की कुल सीटों के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है।
इन 136 सीटों में से अधिकांश पर बीजेपी और एनडीए उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन सीटों पर बीजेपी 65, जेडीयू 41, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 8, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा 3 और राष्ट्रीय लोकमोर्चा 1 सीट पर आगे चल रही है। इसका अर्थ है कि लगभग 80 प्रतिशत सीटों पर बीजेपी और उसके सहयोगियों का दबदबा साफ दिख रहा है।
दूसरी ओर, योगी आदित्यनाथ की सक्रियता का सीधा नुकसान महागठबंधन को हुआ है। जिन सीटों पर उन्होंने प्रचार किया, वहां आरजेडी सिर्फ 16 सीटों पर आगे है, जबकि AIMIM 1 और कम्युनिस्ट पार्टी भी 1 सीट पर बढ़त बनाए हुए है। यह आंकड़ा बताता है कि इन क्षेत्रों में एनडीए का प्रभाव पहले से कई गुना अधिक दिखाई दे रहा है।
इन नतीजों से यह भी साबित होता है कि योगी आदित्यनाथ की छवि और उनकी चुनावी रैलियों का प्रभाव बिहार की राजनीति पर गहराई से पड़ा है। बीजेपी ने इन क्षेत्रों में महागठबंधन को पीछे छोड़ते हुए मजबूत बढ़त हासिल की है, जिससे एनडीए की सरकार बनना अब लगभग तय माना जा रहा है।