लालू के MY पर भारी पड़े नीतीश-मोदी का MY, बिहार में कैसी बनी NDA सरकार, यहां जानिए असली खेल

Bihar Assembly Elections: बिहार में हुए विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना अभी भी जारी है। राज्य में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए प्रचंड जीत की तरफ बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
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कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
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Bihar Assembly Elections: बिहार में हुए विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना अभी भी जारी है। राज्य में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए प्रचंड जीत की तरफ बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। एनडीए की इस बंपर विक्ट्री के पीछे नीतीश कुमार के एम और पीएम नरेन्द्र मोदी के वाई को बड़ा कारण माना जा रहा है। जो आरजेडी के MY पर भी भारी पड़ा है।

आपको बता दें कि इस चुनाव में महिलाओं (M) ने जमकर वोटिंग की है। पुरुषों से करीब 9 फीसदी ज्यादा महिलाओं ने इस बार मतदान किया है। इसका असर नतीजों में भी साफ देखने को मिल रहा है। असर ऐसा है कि सत्ता की बागडोर बड़े मार्जिन से एनडीए को मिलने वाली है।

नीतीश कुमार ने महिलाओं को लुभाया

बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई में महिलाओं की सशक्त बनाने के लिए काफी काम हुए हैं। जीविका दीदी से लेकर महिला रोजगार योजना तक का एनडीए को इस चुनाव में साफ तौर पर मिलता दिख रहा है। इसके साथ ही पूरे चुनाव प्रचार के दौरान युवाओं (Y) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असर दिख रहा था। चुनाव के प्रचार के दौरान महिलाओं में बिहार सरकार और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का असर साफ दिख रहा था। महिलाओं को साफ तौर पर 'जेकर खाइब-ओकर गाइब' कहते हुए सुना गया था। वहीं, कुछ महिलाओं में बिहार सरकार की तरफ से मिले 10 हजार का भी क्रेज दिखा था। यही वजह है कि महिलाओं ने बढ़-चढ़कर चुनाव में हिस्सा लिया और नतीजा एनडीए के पक्ष में जाता दिख रहा है।

सहनी की वजह से छिटके मुस्लिम

लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल को अपने मुस्लिम (M) और यादव (Y) पर भरोसा था। लेकिन मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम कैंडिडेट घोषित करने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि मुस्लिम वोट उनसे छिटक गया। क्योंकि उन्हें भी सत्ता में हिस्सेदारी की उम्मीद थी।

इसके साथ ही सियासी विश्लेषकों का यह भी आकलन यहै कि एनडीए ने यादवों में सेंधमारी कर दी है। एक सर्वे एजेंसी के मुताबिक यादवों का 23 प्रतिशत वोट एनडीए के प्रत्याशियों को मिला है। यही वजह है कि इस बार बिहार में महागठबंधन की हालत पिछली बार से कहीं, ज्यादा बदतर हो गई है।

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