नीतीश कुमार व पीएम मोदी (डिजाइन फोटो)
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना जारी है। लगभग आधे वोटों की गिनती हो चुकी है और जो रुझान सामने आ रहे हैं, वे राज्य की राजनीति में भाजपा के लिए बेहद सकारात्मक संकेत हैं। नीतीश कुमार की जदयू तीन दशकों से भी ज्यादा समय से बिहार में भाजपा की सहयोगी रही है।
नीतीश कुमार ने कई बार भाजपा से मुंह मोड़कर उसके लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। लेकिन अगर अंतिम नतीजे इस बार के चुनावी रुझानों के अनुरूप रहे, तो नीतीश कुमार अब भाजपा का साथ छोड़कर भी बिहार में उसको चुनौती नहीं पेश कर पाएंगे। यह पूरी कहानी समझने के लिए इस आर्टिकल पर उंगलियां फिराते रहिए।
शाम 4 बजे तक भाजपा न केवल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है, बल्कि जदयू के बिना भी वह एनडीए के अन्य सहयोगियों के साथ जादुई संख्या बल को पार करती दिख रही है। इससे नीतीश कुमार के लिए बिहार में किसी भी पद यहा ओहदे के लिए भाजपा के साथ बार्गेनिंग करना मुश्किल होगा।
एक सच यह भी है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बार-बार दोहराया है कि नतीजे चाहे जो भी हों, नीतीश कुमार ही गठबंधन का चेहरा बने रहेंगे। जदयू ने भी दोहराया है कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन अब वह मजबूरी नहीं बल्कि उनकी इच्छा पर निर्भर होगा।
दूसरी तरफ यह भी एक तथ्य है कि 2020 की तुलना में लगभग दोगुनी सीटें जीतने के बावजूद, सत्ता का समीकरण पूरी तरह से जेडीयू से बीजेपी की ओर खिसकता दिख रहा है। अब तक के मतगणना रुझानों से पता चलता है कि एनडीए ने 243 में से 207 सीटों पर बढ़त बना ली है।
अगर जेडीयू की संभावित 85 सीटें कम भी हो जाएं तो भी एनडीए जादुई संख्या तक पहुंच सकता है। बीजेपी 95 सीटों पर, एलजेपी (आर) 19 पर, हम 5 पर और आरएलएम 4 पर आगे चल रही है, जिससे कुल 123 सीटें हो जाती हैं। इस लिहाज से जो नीतीश कुमार बीजेपी के लिए बेहद ज़रूरी थे, अब उसके साथ रहने को मजबूर होंगे।
यह भी पढ़ें: Bihar Election Result: ना तेज…ना तेजस्वी, खेसारी का भी टूटा तिलिस्म; NDA की आंधी में उड़े धुरंधर
अगर जेडीयू अपना रुख बदलकर फिर से महागठबंधन में शामिल हो भी जाए तो भी वह 122 के जादुई आंकड़े से काफी दूर रह जाएगी। ऐसे में, नीतीश कुमार का महागठबंधन के साथ मुख्यमंत्री बनना नामुमकिन होगा। हालांकि, दूसरी ओर केंद्र में मोदी सरकार को मजबूत करने के लिए 12 सांसदों वाली जेडीयू भी जरूरी है।