EV यूजर्स ध्यान दें, बार-बार 100% चार्ज करना पड़ सकता है भारी, ऐसे बचाएं हजारों का नुकसान
EV Charging Safety: आज कल की इलेक्ट्रिक गाड़ियों में एडवांस बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम दिया जाता है, जो बैटरी के वोल्टेज, तापमान और चार्जिंग पैटर्न पर नजर रखता है। जिसमें कई शानदार कार शामिल है।
- Written By: सिमरन सिंह
EV Charger (Source. Pixabay)
Electric Vehicle Battery Life Tips: आजकल इलेक्ट्रिक गाड़ियों में एडवांस बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) दिया जाता है, जो बैटरी के वोल्टेज, तापमान और चार्जिंग पैटर्न पर नजर रखता है। Tesla, MG Motor और Tata Motors जैसी कंपनियां भी सलाह देती हैं कि रोजाना इस्तेमाल के लिए बैटरी को 80% से 90% के बीच ही चार्ज रखना बेहतर होता है। हालांकि BMS बैटरी को सुरक्षित रखता है, लेकिन लंबे समय तक 100% चार्ज रखना बैटरी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
फुल चार्ज करने से क्या होता है?
- बैटरी पर ज्यादा स्ट्रेस:
लिथियम-आयन बैटरियां 100% चार्ज पर हाई वोल्टेज में रहती हैं, जिससे उनके अंदर केमिकल स्ट्रेस बढ़ जाता है और धीरे-धीरे बैटरी की क्षमता कम होने लगती है।
- हीट जनरेशन:
चार्जिंग के आखिरी 10-15% में बैटरी ज्यादा गर्म होती है। बार-बार ऐसा करने से लॉन्ग-टर्म डैमेज बढ़ सकता है।
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- चार्ज साइकल्स पर असर:
हर बैटरी की एक सीमित लाइफ होती है। 0 से 100% तक बार-बार चार्ज करने से यह लाइफ तेजी से घट सकती है।
80% तक चार्ज रखने के फायदे
- लंबी बैटरी लाइफ:
अगर आप बैटरी को 20% से 80% के बीच रखते हैं, तो इसकी उम्र 20-30% तक बढ़ सकती है।
- फास्ट चार्जिंग का फायदा:
80% तक चार्जिंग स्पीड तेज रहती है, जबकि इसके बाद सिस्टम खुद स्पीड कम कर देता है।
- बेहतर परफॉर्मेंस:
ऑप्टिमल रेंज में बैटरी रखने से डिग्रेडेशन कम होता है और गाड़ी की परफॉर्मेंस लंबे समय तक स्थिर रहती है।
थर्मल रनअवे का खतरा भी समझिए
भले ही मॉडर्न BMS ओवरचार्जिंग को कंट्रोल करता है, लेकिन लंबे समय तक 100% चार्ज पर रखने से थर्मल रनअवे का सैद्धांतिक खतरा बढ़ सकता है। यानी बैटरी का तापमान अनियंत्रित होकर नुकसान पहुंचा सकता है।
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रोजाना बनाम लंबी दूरी: कब करें फुल चार्ज?
अक्सर लोग सोचते हैं कि कम चार्ज रखने से बीच रास्ते में बैटरी खत्म हो सकती है। ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह साफ है:
- शहर में रोजाना ड्राइव के लिए 80% लिमिट सेट रखें
- 100% चार्ज सिर्फ तब करें जब लंबी हाईवे यात्रा पर जाना हो
- इससे आप बैटरी की हेल्थ भी बचा पाएंगे और जरूरत पड़ने पर पूरी रेंज भी मिलेगी।
क्या हर EV में यही नियम लागू होता है?
हर इलेक्ट्रिक वाहन में यह नियम पूरी तरह समान नहीं होता। कई कंपनियां 100% दिखाने के बावजूद बैटरी में एक बफर रखती हैं, जिससे ओवरचार्जिंग का खतरा कम हो जाता है। फिर भी, लगातार फुल चार्जिंग से बैटरी हेल्थ इंडिकेटर (SOH) तेजी से गिर सकता है। इसके अलावा, बार-बार DC फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल भी बैटरी डिग्रेडेशन को बढ़ाता है।
