रतन टाटा का सपना: Nano को बनाना चाहते थे भारत की पहली आम आदमी की इलेक्ट्रिक कार

टाटा को वैश्विक पहचान दिलाने वाले रतन टाटा अब नहीं रहें, लेकिन उनकी दूरदर्शिता से बनी कंपनियां करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा हैं। जो आपने अलग काम से लोगों की जिंदगी को अच्छा करना चाहते है।
रतन टाटा का सपना: Nano को बनाना चाहते थे भारत की पहली आम आदमी की इलेक्ट्रिक कार
nano से कैसे देश बदलेगा। (सौ. Tata)
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‘टाटा’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने वाले रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी दूरदर्शिता से बनी कंपनियां और विचार आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा हैं। TCS जैसी अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनी से लेकर टाटा मोटर्स को ट्रक निर्माता से एक प्रमुख पैसेंजर व्हीकल ब्रांड तक ले जाने का सफर, रतन टाटा की सोच का ही परिणाम था। लेकिन इन सबके बीच एक सपना ऐसा भी था जो अधूरा रह गया—Tata Nano को भविष्य की इलेक्ट्रिक कार के रूप में दुनिया के सामने लाना।

Nano को बनाना चाहते थे 'फ्यूचर कार'

रतन टाटा के दिल के बेहद करीब रही Tata Nano उनके लिए सिर्फ एक किफायती कार नहीं, बल्कि एक क्रांति थी। वह इसे भविष्य की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का प्रतीक बनाना चाहते थे। अपने अंतिम वर्षों में भी वह अक्सर इसी कार में यात्रा करते थे, जबकि उनके पास जगुआर और लैंड रोवर जैसी लग्ज़री गाड़ियां थीं। Nano को इलेक्ट्रिक कार के रूप में विकसित करने के इस मिशन को उन्होंने ‘Neo EV’ नाम दिया था।

Nano EV के दो वर्जन की थी योजना

2015 के आसपास रतन टाटा ने Nano EV प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। उनका लक्ष्य था कि इस कार के दो वेरिएंट पेश किए जाएं—एक शहर के लिए छोटा बैटरी पैक और दूसरा लंबी दूरी तय करने के लिए ज्यादा रेंज वाला वर्जन। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कोयंबटूर स्थित एक स्टार्टअप से हाथ मिलाया।

ओला इलेक्ट्रिक के साथ जुड़ा किस्सा

रतन टाटा के इस मिशन का एक दिलचस्प पहलू ओला इलेक्ट्रिक के संस्थापक भाविश अग्रवाल से जुड़ा है। भाविश ने साझा किया कि 2015 में रतन टाटा ने उनकी कंपनी में निवेश किया था। 2017 में उन्होंने भाविश को मुंबई बुलाया और फिर अपने निजी विमान से कोयंबटूर ले गए, जहां Nano को EV में बदलने पर काम चल रहा था। भाविश के अनुसार, “असल में ओला इलेक्ट्रिक की शुरुआत उसी दिन हुई थी।”

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