Rail Tech Portal (Source. X)
Railway Digital Claim: देश के करोड़ों यात्रियों के लिए रेलवे सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि रोज़गार, परिवार और सपनों से जुड़ी जीवनरेखा है। ऐसे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में Rail Tech Portal और e-RCT को लॉन्च कर बड़ा कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि इससे रेलवे में इनोवेशन तेज होगा और क्लेम प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल बनेगी।
Rail Tech Portal का उद्देश्य रेलवे की रोजमर्रा की समस्याओं को सीधे टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स और रिसर्च टीमों से जोड़ना है। अब इनोवेटर्स अपने सॉल्यूशन सीधे पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। रेलवे उन आइडियाज को चुनकर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर टेस्ट करेगी। अगर नतीजे सकारात्मक रहे, तो इन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। इससे नई तकनीक को अपनाने में लगने वाला समय कम हो सकता है और फैसले तेज़ी से जमीन पर उतर सकते हैं।
इस पहल में AI, ट्रैक मॉनिटरिंग, कोच में आग से जुड़ी चेतावनी सिस्टम, सेफ्टी, एनर्जी सेविंग और मेंटेनेंस जैसे अहम क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। लंबे समय से इन मुद्दों पर काम हो रहा था, लेकिन समाधान लागू होने में देरी होती थी। Rail Tech Portal को इसी अंतर को खत्म करने का जरिया बताया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म के जरिए इनोवेटर्स को सिर्फ मौका ही नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट आधारित आर्थिक सहायता भी मिल सकती है। हालांकि यह सीधा फंड ट्रांसफर नहीं है, बल्कि चुने गए सॉल्यूशन के आधार पर सपोर्ट दिया जाएगा। यानी यह कोई सब्सिडी स्कीम नहीं, बल्कि जरूरत के मुताबिक सहयोग देने वाला प्लेटफॉर्म है। वही आइडियाज आगे बढ़ेंगे जो रेलवे की वास्तविक जरूरतों को पूरा करेंगे और टेस्ट में सफल होंगे।
🚆 3rd Railway Reform in 2026
➡️ Rail Tech Policy & Portal launched: Driving innovation in Indian Railways ✅ Simplified single-stage proposals | Open innovation challenges | 3x scale-up grants pic.twitter.com/ihrSS1F5kW — Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 26, 2026
इसका असर आम यात्रियों पर अप्रत्यक्ष रूप से दिखेगा। अगर ट्रैक मॉनिटरिंग और सेफ्टी टेक सफल होती है, तो हादसों का खतरा घट सकता है। कोच में आग या तकनीकी खराबी का पहले पता चल सकेगा। बेहतर मेंटेनेंस से ट्रेनों की लेटलतीफी भी कम हो सकती है। हालांकि, यह बदलाव धीरे-धीरे दिखाई देगा।
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Railway Claims Tribunal की प्रक्रिया को अब e-RCT के जरिए डिजिटल कर दिया गया है। क्लेम फाइलिंग और ट्रैकिंग ऑनलाइन होगी। यात्रियों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और केस का स्टेटस मोबाइल या कंप्यूटर से देखा जा सकेगा। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन असली बदलाव तब माना जाएगा जब केस निपटाने की रफ्तार भी तेज़ होगी। रेलवे में पहले भी कई डिजिटल पहलें हुई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या Rail Tech Portal और e-RCT वाकई रेलवे सुधार की मजबूत शुरुआत साबित होंगे या फिर एक और पोर्टल बनकर रह जाएंगे।