पैसा कट गया तो मत कहना, कार सर्विस में ये गलती तो पड़ेगा महंगा, जान लें सही टाइमिंग
Car Service Tips: कार की सर्विस पूरी तरह सर्विस सेंटर के भरोसे छोड़ देते हैं। वहां जो सलाह दी जाती है, उसी के अनुसार काम करा लेते हैं चाहे जरूरत हो या नहीं। तो आपको सूचने की जरूरत है।
- Written By: सिमरन सिंह
Car Service (Source. Freepik)
Car Service Engine Oil Change Time: अक्सर लोग अपनी कार की सर्विस पूरी तरह सर्विस सेंटर के भरोसे छोड़ देते हैं। वहां जो सलाह दी जाती है, उसी के अनुसार काम करा लेते हैं चाहे जरूरत हो या नहीं। लेकिन सच्चाई यह है कि समझदारी से की गई मेंटेनेंस ही आपको बेवजह खर्च से बचा सकती है। हर पार्ट की एक तय उम्र और किलोमीटर सीमा होती है, जिसे जानना बेहद जरूरी है।
इंजन ऑयल: कार की लाइफलाइन
कार का इंजन ऑयल उसके दिल की तरह काम करता है। अगर आप मिनरल ऑयल इस्तेमाल करते हैं, तो इसे हर 5,000 से 10,000 किलोमीटर या लगभग 6 महीने में बदलना बेहतर होता है।
वहीं सिंथेटिक ऑयल ज्यादा टिकाऊ होता है, जिसे 10,000 किलोमीटर या करीब एक साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें, नया ऑयल डालते समय पुराना ऑयल पूरी तरह निकालना जरूरी है, वरना इंजन पर असर पड़ सकता है।
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एयर फिल्टर: इंजन की सांस का रखवाला
एयर फिल्टर का काम इंजन तक साफ हवा पहुंचाना होता है। अगर आप ज्यादा धूल या प्रदूषण वाले इलाके में गाड़ी चलाते हैं, तो इसे हर 6 महीने में बदलना चाहिए। वहीं अगर आप साफ-सुथरे वातावरण में ड्राइव करते हैं, तो साल में एक बार बदलना भी काफी होता है। समय पर एयर फिल्टर बदलने से इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर रहती है।
टायर रोटेशन: छोटा काम, बड़ा फायदा
टायर रोटेशन को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यह बेहद जरूरी प्रक्रिया है। इसमें चारों टायरों की पोजीशन बदलकर उन्हें बराबर घिसने दिया जाता है। इसे हर 8,000 से 10,000 किलोमीटर पर करवाना चाहिए। इससे टायर की लाइफ बढ़ती है और गाड़ी चलाते समय संतुलन भी बना रहता है।
गियर ऑयल: जल्दी बदलना जरूरी नहीं
कई लोग गियर ऑयल को जल्दी-जल्दी बदलवा देते हैं, जबकि इसकी जरूरत नहीं होती। आमतौर पर इसे 50,000 से 60,000 किलोमीटर या 4-5 साल के बाद बदलना सही रहता है। अगर कोई खास दिक्कत नहीं है, तो इससे पहले इसे बदलवाने की जरूरत नहीं होती।
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ब्रेक पैड्स और अन्य जरूरी पार्ट्स
शहर में ज्यादा ड्राइव करने से ब्रेक पैड्स जल्दी घिस जाते हैं। इसलिए इन्हें हर 10,000 से 20,000 किलोमीटर के बीच चेक जरूर कराएं। जरूरत पड़ने पर तुरंत बदलवाना चाहिए। इसके अलावा कूलेंट और स्पार्क प्लग जैसे पार्ट्स को लगभग 30,000 से 40,000 किलोमीटर के बाद बदलना पर्याप्त होता है।
सबसे जरूरी बात: कार की हालत समझें
सिर्फ सर्विस सेंटर की सलाह पर भरोसा करने के बजाय अपनी कार की कंडीशन को समझें। कंपनी के मैनुअल के अनुसार मेंटेनेंस करें, ताकि बेवजह खर्च से बचा जा सके और आपकी गाड़ी लंबे समय तक बेहतर परफॉर्म करे।
