Zepto, Uber, Ola समेत 11 कंपनियों पर सरकार की सख्त नजर, डार्क पैटर्न तकनीक के इस्तेमाल पर भेजा नोटिस

Zepto, Uber, Ola, Rapido जैसी 11 नामी कंपनियों को "डार्क पैटर्न" अपनाने के आरोप में नोटिस जारी किया गया है। सरकार ने इस चीज को देखते हुए इस कदम को उठाया है।
Zepto, Uber, Ola समेत 11 कंपनियों पर सरकार की सख्त नजर, डार्क पैटर्न तकनीक के इस्तेमाल पर भेजा नोटिस
Zepto, Uber, Ola पर सरकार ने किया केस। (सौ. Design)
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नई दिल्ली: उपभोक्ताओं के साथ छल करने वाली तकनीकों पर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Zepto, Uber, Ola, Rapido जैसी 11 नामी कंपनियों को "डार्क पैटर्न" अपनाने के आरोप में नोटिस जारी किया गया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इन कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि ये भ्रामक डिज़ाइन तकनीकें तुरंत बंद नहीं की गईं, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है ‘डार्क पैटर्न’?

डार्क पैटर्न दरअसल ऐसे डिज़ाइन या इंटरफेस ट्रिक्स होते हैं जो यूजर्स को जानबूझकर गुमराह करते हैं, जिससे वे ऐसे निर्णय लेने पर मजबूर हो जाते हैं जो सामान्य परिस्थिति में वे नहीं लेते। इसके उदाहरण हैं:

  • बिना जानकारी दिए प्रोडक्ट को कार्ट में जोड़ना
  • “अब नहीं” जैसे विकल्प को शर्मिंदगी से जोड़कर प्रस्तुत करना
  • छिपे हुए चार्जेज लगाना
  • "बस 1 यूनिट बची है" जैसे झूठे अलर्ट दिखाकर निर्णय को प्रभावित करना

कंपनियों को करनी होगी प्लेटफॉर्म की जांच

सरकार ने अब तक 13 प्रमुख डार्क पैटर्न्स की पहचान की है और उन पर रोक लगाई है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट किया है कि,“सभी कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म का ऑडिट कर यह सुनिश्चित करना होगा कि वे या उनके विक्रेता उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले ट्रिक्स का उपयोग न करें।” ऑडिट रिपोर्ट कंपनियों को सरकार के समक्ष पेश करनी होगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

चेतावनी के बावजूद नहीं मानी बात, तो होगी कार्रवाई

यदि कंपनियां इन भ्रामक तकनीकों को बंद नहीं करतीं, तो Central Consumer Protection Authority (CCPA) उनके खिलाफ कड़ा एक्शन ले सकती है। इसमें भारी जुर्माना, और गंभीर मामलों में कंपनी के संचालन पर प्रतिबंध भी शामिल है।

सरकार बनाएगी संयुक्त कार्य समूह

इस पूरे मामले पर निगरानी के लिए सरकार एक Joint Task Force गठित कर रही है, जिसमें सरकारी अधिकारी, कंपनियों के प्रतिनिधि और उपभोक्ता संगठनों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य होगा –

  • डार्क पैटर्न्स की पहचान और रोकथाम
  • उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा
  • और एथिकल डिज़ाइन प्रैक्टिस को बढ़ावा देना।

ध्यान दें

डिजिटल युग में जब हर फैसला एक क्लिक पर निर्भर करता है, उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाली तकनीकों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। सरकार का यह कदम उपभोक्ता हितों की सुरक्षा की दिशा में एक अहम पहल है।

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