BMC Election 2026 में नाका मजदूरों के ‘अच्छे दिन’, काम और कमाई दोनों बढ़े

BMC Election ने मुंबई के नाका मजदूरों के लिए रोजगार के नए अवसर खोल दिए हैं। रैलियों और रोड शो के लिए मजदूरों की बढ़ी मांग से दिहाड़ी दोगुनी हो गई है और कई मजदूर 10 दिनों में डेढ़ महीने की कमाई कर रहे।
Daily Wage Worker
दिहाड़ी मजदूर (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai News In Hindi: बीएमसी चुनाव में मुंबई के नाका मजदूरों के लिए अच्छे दिन आ गए हैं। जहां आम दिनों में काम की तलाश में भटकने वाले दिहाड़ी मजदूरों को मुश्किल से दो-तीन दिन काम मिल पाता है, वहीं चुनावी माहौल ने इनकी मांग अचानक बढ़ा दी है।

राजनीतिक दलों को रैलियों और रोड शो में भीड़ दिखाने के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ रही है। मुंबई के ताड़देव, दादर, खार, सांताक्रुज, कांदिवली, कुला जैसे इलाकों में लगने वाले नाकों पर सुबह से मजदूर जमा होते हैं।

सामान्य दिनों में ये मजदूर निर्माण कार्य, पेंटिंग, वुड पॉलिश, फर्नीचर और खुदाई जैसे कामों के लिए ठेकेदारों का इंतजार करते हैं, लेकिन शादी-ब्याह का सीजन खत्म होने के बाद काम घट गया था, जिससे मजदूरों की आमदनी प्रभावित हो रही थी।

रैलियों के लिए ठेके पर लाए जा रहे हैं मजदूर

अब चुनाव प्रचार के चलते हालात बदलते दिख रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि राजनीतिक दल उन्हें 10 से 12 दिन के कॉन्ट्रैक्ट पर रैलियों में शामिल होने के लिए ले जा रहे हैं। जहां पहले दिहाड़ी 700 800 रुपए मिलते थे, अब 1500 से 1600 रुपए, साथ में नाश्ता और भोजन भी दिया जा रहा है।

मुंबई में 10 से 15 मजदूर नाके हैं। इसके अलावा दिहाड़ी की तलाश में हर सुबह छोटे-बड़े चौकों पर मजदूरों के मेले लगते हैं। यह देखा जा सकता है कि प्रवासियों की संख्या काफी है, उनमें से हर किसी को हर दिन रोजगार नहीं मिलता है, लेकिन मुंबई चुनाव की वजह से अब हर किसी को नौकरी की गारंटी मिल गई है और कम से कम चुनाव तक नौकरी का मामला सुलझ जाने से मजदूरों में खुशी का माहौल है।

10-12 दिनों में डेढ़ महीने की कमाई

  • एक मजदूर ने बताया कि चुनावी रैलियों में काम करके वे 10-12 दिनों में डेढ़ महीने की कमाई कर पा रहे हैं। इसी वजह से कई मजदूर अपने रोजमर्रा के निर्माण कार्य छोड़कर राजनीतिक दलों के साथ जुड़ने को तैयार हैं।
  • बीएमसी चुनाव की गहमागहमी ने जहां सिवासी सरगर्मी बढ़ा दी है, वहीं शहर के हजारों नाका मजदूरों के लिए यह दौर रोजगार और राहत लेकर आया है।

मुंबई से नवभारत लाइव के लिए भगवती प्रसाद मिश्रा की रिपोर्ट

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