Electric Vehicles की ओर तेज़ी से बढ़ता रुख, डीलरशिप स्तर पर बढ़ी चुनौतियां
EV Dealership Issues: इलेक्ट्रिक वाहनों की तेज़ी से बढ़ती मांग ने डीलरशिप और वर्कशॉप स्तर पर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जिस वजह से अब सभी की मांग पूरी करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- Written By: सिमरन सिंह
Electric vehicle की मांग हुई बढ़त। (सौ. Freepik)
EV Training India: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तेज़ी से बढ़ती मांग ने डीलरशिप और वर्कशॉप स्तर पर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जहां ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) लगातार नई-नई एडवांस तकनीकें पेश कर रहे हैं, वहीं डीलर्स और स्टाफ के सामने नई स्किल्स सीखने और ग्राहकों को शिक्षित करने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।
EV बनाम ICE कार: ग्राहकों को समझाने में लगता है अधिक समय
ऑटोमोटिव स्किल डेवलपमेंट काउंसिल (ASDC) के अध्यक्ष विंकश गुलाटी ने कहा, “For an ICE car, a 10-minute session with the customer is enough. In the case of EVs, it is a six-hour journey. You have to explain the battery, charging safety, types of chargers and even fire precautions.”
उन्होंने बताया कि EV शिक्षा केवल वाहन की बुनियादी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बैटरी, चार्जिंग सिस्टम, ब्रेकडाउन प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपायों की गहरी समझ भी शामिल है। इसके लिए कुशल और प्रशिक्षित जनशक्ति की आवश्यकता है।
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सीमित समय में प्रशिक्षण बनी मुश्किल
ASDC ने पहले ही चेतावनी दी है कि डीलर्स को नए EV मॉडल्स की लॉन्चिंग से पहले प्रशिक्षण के लिए बहुत कम समय मिलता है। गुलाटी के अनुसार, “Dealers typically get just 15 to 30 days to prepare for this. This leaves little time for adequate preparation. Each EV has its own ergonomics and structure which cannot be addressed by generic training alone.” उन्होंने OEMs और डीलर्स के बीच बेहतर तालमेल की मांग की, ताकि प्रशिक्षण अधिक प्रभावी हो सके।
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AI और ऑटोमेशन से नहीं घटेंगी नौकरियां
गुलाटी ने यह भी स्पष्ट किया कि EV तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नौकरियों के लिए खतरा नहीं है। उन्होंने कहा, “AI is more of a diagnostic tool, not a replacement for repair or service roles.” उनके अनुसार, AI केवल फॉल्ट डायग्नोसिस में मदद कर सकता है, लेकिन मरम्मत, क्वालिटी चेक, ग्राहक शिक्षा और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में मानव श्रम की भूमिका अनिवार्य है।
युवाओं का रुझान घटा, महिलाओं पर फोकस
ऑटोमोबाइल सेक्टर की चमक-दमक के बावजूद आज के युवा कंप्यूटर साइंस और AI की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिससे मैकेनिकल इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में टैलेंट की कमी देखी जा रही है। इस चुनौती का समाधान बताते हुए गुलाटी ने कहा कि ASDC अब 10वीं और 12वीं के छात्रों की भर्ती व प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। साथ ही, संगठन महिलाओं को भी इस महत्वपूर्ण उद्योग में शामिल करने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है।
