चीन की EV बैटरी तकनीकों पर रोक: भारत समेत कई देशों पर संकट के बादल

EV Battery Technology की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन चीन की हालिया सख्त नीति ने इस ग्रोथ को झटका दे दिया है। चीन ने अब EV बैटरी निर्माण और लिथियम प्रोसेसिंग तकनीकों के निर्यात पर रोक लगा दी है।
चीन की EV बैटरी तकनीकों पर रोक: भारत समेत कई देशों की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर संकट के बादल
China का बड़ा फैसला। (सौ. Freepik)
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EV Battery Technology: दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन चीन की हालिया सख्त नीति ने इस ग्रोथ को झटका दे दिया है। चीन ने अब EV बैटरी निर्माण और लिथियम प्रोसेसिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों के निर्यात पर रोक लगा दी है। यह फैसला भारत, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों के EV उत्पादन पर सीधा असर डाल सकता है। “अब ये तकनीकें सिर्फ सरकार से लाइसेंस मिलने के बाद ही एक्सपोर्ट की जा सकेंगी।” – चीन के वाणिज्य मंत्रालय का बयान

किस तकनीक पर लगी है पाबंदी?

चीन की नई रोक का सीधा असर Lithium Iron Phosphate (LFP) बैटरी टेक्नोलॉजी पर है। ये बैटरियां कम लागत वाली, जल्दी चार्ज होने वाली और सुरक्षित मानी जाती हैं।

  • 2023 के आंकड़ों के अनुसार, LFP बैटरी निर्माण में चीन की हिस्सेदारी 94% और लिथियम प्रोसेसिंग में 70% रही।
  • इसका अर्थ है कि EV बैटरियों के इस सबसे सस्ते और लोकप्रिय सेगमेंट पर चीन का लगभग पूर्ण नियंत्रण है, जिसे वह अब बनाए रखना चाहता है।

चीन EV बैटरियों का सबसे बड़ा निर्माता

रिसर्च फर्म SNE के मुताबिक, दुनियाभर में बिकने वाली EV बैटरियों में से लगभग 67% चीन की कंपनियों द्वारा बनाई जाती हैं।

  • प्रमुख कंपनियों में CATL, BYD, और Gotion शामिल हैं।
  • CATL, Tesla जैसी दिग्गज कंपनियों को बैटरियां सप्लाई करती है, और इसके प्लांट्स जर्मनी, हंगरी और स्पेन में भी हैं।
  • 2024 में BYD ने Tesla को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी EV कंपनी बनने का गौरव प्राप्त किया।

पहले भी लगा चुका है चीन तकनीकी प्रतिबंध

यह पहली बार नहीं है जब चीन ने तकनीकी एक्सपोर्ट पर रोक लगाई हो। इससे पहले भी वह रेयर अर्थ मटेरियल्स और मैग्नेट्स के निर्यात पर पाबंदियां लगा चुका है, जिनका इस्तेमाल EVs, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों में होता है।

भारत के EV सपनों को झटका

भारत जैसे देश, जो अभी भी EV टेक्नोलॉजी के लिए चीन पर भारी निर्भर हैं, वहां यह फैसला बड़ा असर डाल सकता है।

  • बैटरियों की सप्लाई घट सकती है
  • उत्पादन लागत बढ़ेगी
  • नई लॉन्च योजनाएं धीमी पड़ सकती हैं

“चीन का यह कदम वैश्विक EV इंडस्ट्री की गति को धीमा कर सकता है।” – इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मत

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