
Electric Vehicle Market (Source. Freepik)
EV Market India: साल 2025 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने की रफ्तार को जबरदस्त बढ़ावा मिला है। भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) की सक्रिय भूमिका, पीएम ई-ड्राइव पहल और पीएलआई-ऑटो योजना के तहत रिकॉर्ड निवेश ने ईवी सेक्टर को नई गति दी है। आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्ष 2024-25 में पीएलआई-ऑटो योजना के अंतर्गत कंपनियों को 1,999.94 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक पीएलआई-ऑटो योजना के तहत 13.61 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को इंसेंटिव दिया गया। इसमें 10.42 लाख से ज्यादा दोपहिया, 2.38 लाख से अधिक तिपहिया, 79,540 इलेक्ट्रिक कारें और 1,391 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इससे साफ है कि आम लोगों की पहुंच में ईवी लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना की शुरुआत 29 सितंबर 2024 को की गई थी, जिसके लिए सरकार ने 10,900 करोड़ रुपये का बजट तय किया। इस योजना का मकसद ईवी को बढ़ावा देना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना और ईवी मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत ढांचा तैयार करना है। योजना के तहत 3,679 करोड़ रुपये की सब्सिडी तय की गई है, ताकि 28 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहन मिल सके। इसमें 24.79 लाख दोपहिया, 3.28 लाख तिपहिया और 5,643 इलेक्ट्रिक ट्रक शामिल हैं।
शहरी प्रदूषण कम करने के लिए योजना के अंतर्गत 4,391 करोड़ रुपये से 14,028 इलेक्ट्रिक बसें सार्वजनिक परिवहन में उतारी जाएंगी। 31 दिसंबर 2025 तक 1,703.32 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं और 21.36 लाख से ज्यादा ईवी बिक चुके हैं। सरकारी कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) ने 10,900 इलेक्ट्रिक बसों की निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है। पहले चरण में ये बसें दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद और बेंगलुरु में चलेंगी।
कंसल्टेंसी फर्म बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस के अनुसार, 2025 में वैश्विक ईवी बिक्री 20% बढ़कर 2.07 करोड़ तक पहुंची। 2026 के लिए अनुमान है कि दुनिया भर में 2.39 करोड़ ईवी बिकेंगी (15.7% ग्रोथ), चीन में ग्रोथ 21% तक लौट सकती है, जबकि अमेरिका में 29% की गिरावट की आशंका है। भारत के ईवी बाजार में 36% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से विस्तार का अनुमान है।
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सरकार ने 15 मार्च 2024 को इलेक्ट्रिक कार निर्माण को बढ़ावा देने की विशेष योजना अधिसूचित की थी। इसके तहत कंपनियों को तीन साल में कम से कम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ से जुड़ी है, जिससे घरेलू निर्माण बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।






