वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पर लग रहे अमेरिका से मिलीभगत के आरोप (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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Venezuela की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पर क्यों लग रहे अमेरिका से मिलीभगत के आरोप? जानें पूरी सच्चाई

Delcy Rodriguez & US: वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पर अमेरिका से मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। लेकिन एक लीक वीडियो के अनुसार जान से मरने की धमकी पर उन्होंने अमेरिकी सेना की शर्तें मानीं।

प्रिया सिंह

US military intervention in Venezuela: वेनेजुएला में मचे भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पर अमेरिकी सेना से मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं लेकिन एक नया और चौंकाने वाला लीक वीडियो सामने आया है जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मच गया है। इस वीडियो में कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने दावा किया है कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हमले के समय उन पर भयानक मानसिक और सामरिक दबाव था। रोड्रिगेज ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण के बाद उन्हें अपनी जान बचाने के लिए कड़े फैसले लेने पड़े ताकि देश को अराजकता से बचाया जा सके। इस सनसनीखेज खुलासे ने वेनेजुएला की संप्रभुता और अमेरिकी हस्तक्षेप पर एक नई और गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।

15 मिनट का अल्टीमेटम

लीक हुए वीडियो के अनुसार डेल्सी रोड्रिगेज ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने उनके मंत्रिमंडल को केवल 15 मिनट का समय दिया था। इस दौरान उन्हें साफ तौर पर चेतावनी दी गई थी कि या तो वे अमेरिका की सभी शर्तों को मान लें या फिर मरने के लिए तैयार रहें। रोड्रिगेज के अनुसार यह धमकियां मादुरो के पकड़े जाने के पहले ही मिनट से उनके भाई जॉर्ज रोड्रिगेज और गृह मंत्री डियोसडाडो कैबेलो पर शुरू हो गई थीं।

मौत की झूठी खबर

रोड्रिगेज ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिकी सशस्त्र बलों ने उन्हें जानबूझकर यह गलत जानकारी दी थी कि मादुरो की हत्या कर दी गई है। उन्हें बताया गया था कि निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस अब इस दुनिया में नहीं रहे ताकि वे पूरी तरह से टूट जाएं। हालांकि बाद में पता चला कि उनका केवल अपहरण किया गया था और वे उस समय अमेरिकी हिरासत में पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ थे।

सत्ता बचाने की प्राथमिकता

दो घंटे की इस लंबी बैठक की लीक रिकॉर्डिंग में डेल्सी रोड्रिगेज को यह कहते सुना जा सकता है कि उनकी पहली प्राथमिकता वेनेजुएला की राजनीतिक सत्ता को बचाना थी। उन्होंने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी लेना उनके लिए बहुत ही दुखदायी और चुनौतीपूर्ण अनुभव साबित हुआ था। इसी कारण उन्होंने अमेरिका की मांगों को स्वीकार किया ताकि वेनेजुएला को किसी और बड़ी तबाही या सैन्य हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।

रणनीतिक सूझबूझ का दावा

रोड्रिगेज ने अपने तीन मुख्य लक्ष्यों को गिनाते हुए बताया कि उन्हें देश में शांति बनाए रखनी थी और बंधकों को सुरक्षित छुड़ाना था। उन्होंने कहा कि वह और उनके सहयोगी आज भी अपने बयानों पर कायम हैं क्योंकि धमकियां और ब्लैकमेल करने का सिलसिला अब भी जारी है। उनका मानना है कि वर्तमान संकट के बीच वेनेजुएला को बहुत ही धैर्य और रणनीतिक सूझबूझ के साथ आगे बढ़ने की सख्त आवश्यकता है।

मिलीभगत के आरोप

हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों जैसे मार्गरीटा लोपेज माया का मानना है कि यह रोड्रिगेज की खुद की गढ़ी हुई एक काल्पनिक कहानी भी हो सकती है। उनका कहना है कि मादुरो को सत्ता से हटाना बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं था और शायद रोड्रिगेज इसमें शुरू से शामिल थीं। ऐसी खबरें भी आई थीं कि रोड्रिगेज और उनके भाई ने मादुरो की गिरफ्तारी से पहले ही ट्रंप के साथ सहयोग करने की कसम खाई थी।

ट्रंप की प्रशंसा और धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रोड्रिगेज की इस बात के लिए प्रशंसा की है कि उन्होंने बिना विरोध के उनकी सभी मांगों को मान लिया। लेकिन ट्रंप ने साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर रोड्रिगेज ने सही काम नहीं किया तो उन्हें मादुरो से भी बड़ी कीमत चुकानी होगी। फिलहाल वेनेजुएला सरकार ऊपर से अमेरिका का विरोध कर रही है लेकिन हकीकत में वह ट्रंप की हर बात का पालन कर रही है।

मादुरो की कानूनी लड़ाई

दूसरी ओर पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया गया है जहां उन्होंने खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है। मादुरो ने अदालत में दावा किया कि उनका अवैध रूप से अपहरण किया गया है और वे किसी भी तरह के अपराध में शामिल नहीं रहे हैं। इस बीच रोड्रिगेज ने हयूगो शावेज की कसम खाकर अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में देश का कार्यभार औपचारिक रूप से संभाल लिया है।

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