US Pilot Rescue Iran: ईरान(Iran) में फंसे अपने पायलट को निकालने के लिए अमेरिका को एक जटिल अभियान चलाना पड़ा, जिसके दौरान उसे अपने ही विमान को नष्ट करना पड़ा और करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने इस मिशन के दौरान अपने ब्लॉक हॉक हेलिकॉप्टरों पर ईरान के हमलों का सामना किया, और दो ट्रांसपोर्ट विमानों में तकनीकी खामी आ गई, जिसके कारण वे उड़ान भरने में असमर्थ हो गए।
अमेरिकी सेना ने अपनी स्थिति को बचाने के लिए इन विमानों को नष्ट कर दिया। लॉकहीड मार्टिन सी-130 विमान जो रेतीली ज़मीन पर लैंडिंग में नाकाम हो गए थे, महत्वपूर्ण उपकरण और गोपनीय तकनीक के साथ थे। अमेरिकी सेना को डर था कि अगर ये विमान ईरान(Iran) के हाथ में चले गए तो यह गोपनीय जानकारी लीक हो सकती थी। इस स्थिति को देखते हुए, अमेरिकी सेना ने इन विमानों को खुद ही नष्ट कर दिया। इन विमानों की कीमत 10 करोड़ डॉलर के आसपास थी। ईरान ने बाद में इन विमानों के बिखरे हुए पार्ट्स का वीडियो साझा किया, और दावा किया कि अमेरिका ने इन्हें नष्ट कर दिया था।
यह स्थिति कुछ हद तक ओसामा बिन लादेन पर हमले के दौरान की स्थिति से मेल खाती है। पाकिस्तान के एबटाबाद में चलाए गए उस अभियान में भी अमेरिकी सेना को अपने विशेष विमान को नष्ट करना पड़ा था। उस वक्त भी अमेरिकी सेना ने गोपनीय तकनीक और एडवांस नेविगेशन सिस्टम से लैस विमानों को नष्ट किया था ताकि ये तकनीकी जानकारी दुश्मन के हाथ न लगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस अभियान को लेकर पोस्ट किए और इसे "फिल्म जैसा अभियान" बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान अमेरिका को पूरी तरह चुप रहना पड़ा ताकि मिशन की सुरक्षा बनी रहे। राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन के उच्च अधिकारी लगातार पायलट की लोकेशन पर नजर रखे हुए थे।
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इस मिशन के दौरान वाइट हाउस और पेंटागन ने पहले पायलट के बचाव अभियान के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं दी। ट्रंप ने बताया कि ईरान(Iran) में यह अभियान दिन के उजाले में सात घंटे तक चला, और अमेरिकी सेना ने इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया।