US Iran Airstrikes Two American Soldiers Killed In Jordan: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष बहुत ही खतरनाक मोड़ पर आ गया है। जॉर्डन में 17 जुलाई को हुए भयानक ड्रोन हमले में 2 अमेरिकी सैनिकों की दुखद मौत हो गई है। इस हमले के तुरंत बाद अमेरिका ने भी अपनी कड़ी जवाबी कार्रवाई तेजी से शुरू कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर सेना ने ईरान के खिलाफ बड़े हवाई हमले किए हैं।
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शनिवार को आधिकारिक रूप से अपने इन हवाई हमलों की पुष्टि दुनिया के सामने की है। अमेरिका का आरोप है कि जॉर्डन में हुए इन ड्रोन हमलों के पीछे सीधे तौर पर आईआरजीसी का हाथ था। सेना का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की बढ़ती सैन्य ताकत को पूरी तरह से कमजोर करना है। इस घटना में एक सैनिक लापता है और चार अन्य घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।
CENTCOM ने आधिकारिक बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि वे आईआरजीसी की सेनाओं को तुरंत कड़ा सबक सिखाना चाहते हैं। शुक्रवार रात जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर अचानक बहुत भारी और खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइल हमले हुए थे। इन्ही हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अमेरिका ने ईरान के कई अहम ठिकानों पर बमबारी शुरू की है। इस ताजा हमले से पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शहीद हुए दोनों सैनिकों की दर्दनाक मौत पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह हमारे देश के लिए सच में एक बेहद ही दुखद घटना है। उन्होंने कहा कि ये दोनों बहादुर जवान देश की सेवा करते हुए पूरी बहादुरी के साथ शहीद हुए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी सोशल मीडिया के जरिए इन वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
CENTCOM के अधिकारियों ने बताया है कि शहीद होने वाले दोनों अमेरिकी सैनिकों की पहचान फिलहाल सुरक्षा कारणों से गुप्त है। परिजनों और परिवारों को जानकारी देने के बाद ही सेना इन दोनों जवानों के नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक करेगी। इसके अलावा हमले में घायल हुए चारों अन्य अमेरिकी सैनिकों ने भी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपनी ड्यूटी संभाल ली है। अमेरिका अपनी सेना की सुरक्षा को लेकर हमेशा से ही सतर्क रुख अपनाता है।
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रक्षा विशेषज्ञों का दृढ़ता से मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह सैन्य कार्रवाई इसी तरह चली तो अंजाम बुरा होगा। यह पूरा पश्चिमी एशिया क्षेत्र बहुत जल्द एक बड़े और विनाशकारी युद्ध की भयानक चपेट में पूरी तरह आ सकता है। इसके कारण पूरी दुनिया में कच्चे तेल की भारी कमी और बड़े व्यापारिक संकट के उत्पन्न होने की गंभीर आशंका बढ़ गई है। हालात शांत न होने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इस युद्ध का नकारात्मक असर पड़ना तय है।