

US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार रात दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि लगातार सातवीं रात ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों, निगरानी केंद्रों, लॉजिस्टिक हब और भूमिगत हथियार भंडार को निशाना बनाया गया। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन समेत कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने CBS News को बताया कि इस सप्ताह जॉर्डन में अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कम से कम दो सैन्य ठिकानों पर हमले हुए, जिनमें कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। हालांकि, अभी तक घायल सैनिकों की संख्या, उनकी पहचान या चोटों की गंभीरता की आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने भी फिलहाल इन चोटों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, ओमान और सीरिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए। IRGC का दावा है कि हमलों में कमांड सेंटर, विमान शेल्टर, ईंधन भंडारण, गोला-बारूद डिपो और HIMARS लॉन्चर जैसे सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया गया।
जॉर्डन की सेना ने बयान जारी कर कहा कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने ईरान की 10 मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर मार गिराया। सेना के अनुसार किसी भी नागरिक या सैन्य ठिकाने को नुकसान नहीं पहुंचा और न ही किसी के हताहत होने की सूचना है।
जॉर्डन स्थित मुवाफ़्फक साल्ट एयरबेस मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां अमेरिकी लड़ाकू विमान, ड्रोन और सहायता बल तैनात रहते हैं। हाल के महीनों में इसे ईरान के खिलाफ संभावित अभियानों के लिए भी महत्वपूर्ण हब माना गया है। इसके अलावा जॉर्डन में अमेरिका के Tower-22, Prince Hassan Air Base और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी सैनिक तैनात हैं। अनुमान के अनुसार जॉर्डन में अमेरिका के करीब 3,000 से 4,000 सैनिक मौजूद हैं।
ईरान का दावा है कि उसके हमलों में अमेरिकी सैनिक हताहत हुए और सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने केवल कुछ सैनिकों के घायल होने की जानकारी दी है। दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच यह घटनाक्रम क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।