नेपाल पर्यटन पर पश्चिम एशिया संकट का साया, अमेरिकी और यूरोपीय पर्यटकों में भारी गिरावट; भारत बना 'संकटमोचक'

Nepal Tourism Iran War Impact: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने नेपाल के पर्यटन उद्योग को प्रभावित किया है। मार्च में यूरोप और अमेरिका से आने वाले पर्यटकों में गिरावट आई है।
Shadow of West Asian Crisis Looms Over Nepal Tourism; Sharp Decline in American and European Tourists India Emerges as the 'Savior'
नेपाल पर्यटन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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West Asia Conflict Tourism Effect: पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संघर्ष की तपिश अब हिमालय की गोद में बसे नेपाल तक पहुंच गई है। नेपाल का पर्यटन उद्योग जो मार्च के महीने में अपने चरम पर होता है वर्तमान में वैश्विक तनाव और उड़ानों में व्यवधान के कारण बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि यूरोप, अमेरिका और पश्चिम एशिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसायों पर सीधा असर पड़ रहा है।

वैश्विक तनाव का पर्यटन पर सीधा असर

नेपाल टूरिज्म बोर्ड (NTB) के अनुसार, 28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए सैन्य संघर्ष ने वैश्विक यात्रा और अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। मार्च का महीना नेपाल के लिए ट्रेकिंग और पर्वतारोहण का मुख्य सीजन माना जाता है, लेकिन इस बार वैश्विक तनाव ने लंबी दूरी के विदेशी सैलानियों के उत्साह पर पानी फेर दिया है। मार्च 2026 में नेपाल पहुंचने वाले कुल विदेशी पर्यटकों की संख्या में सालाना आधार पर एक प्रतिशत की कमी आई है जो अब घटकर 1,20,516 रह गई है।

ट्रांजिट रूट में बाधा

पर्यटकों की संख्या में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण 'ट्रांजिट रूट' की समस्या बताई जा रही है। दरअसल, यूरोप और अमेरिका से आने वाले अधिकांश लंबी दूरी के यात्री पश्चिम एशिया को एक प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करते हैं। मौजूदा संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में उड़ानों के रद्द होने और यात्रा योजनाओं में बाधा आने से नेपाल आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रभावित हुई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पश्चिम एशिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या में 37.1 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इसी तरह, अमेरिकी महाद्वीप से आने वाले सैलानियों में 25.4 प्रतिशत, अफ्रीका से 22.2 प्रतिशत और यूरोप से आने वाले पर्यटकों में 18.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

भारत ने थामी नेपाल की अर्थव्यवस्था

जहां एक ओर पश्चिमी देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या कम हुई है वहीं पड़ोसी दक्षिण एशियाई देशों ने नेपाल के पर्यटन क्षेत्र को एक मजबूत सहारा दिया है। मार्च के महीने में दक्षिण एशिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या में 20.9 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इस वृद्धि में भारत की भूमिका सबसे अहम रही है जहां से सर्वाधिक 25,728 पर्यटक गर्मी से राहत पाने और सांस्कृतिक यात्रा के उद्देश्य से नेपाल पहुंचे। श्रीलंका और बांग्लादेश से भी पर्यटकों की अच्छी भागीदारी देखी गई है।

एशियाई बाजार और भविष्य की रणनीति

पश्चिमी देशों में गिरावट के बावजूद, चीन, म्यांमार, थाईलैंड, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य एशियाई देशों से कुल 33,436 पर्यटक नेपाल पहुंचे जो एक उत्साहजनक आंकड़ा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के सीईओ दीपक राज जोशी ने विश्वास जताया है कि पड़ोसी देशों से बढ़ते पर्यटकों का रुझान एक सकारात्मक संकेत है और बोर्ड अब इन बाजारों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है।

इसके साथ ही, बोर्ड उच्च खर्च करने वाले यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में अपनी पैठ दोबारा मजबूत करने के प्रयास भी जारी रखे हुए है। वर्तमान अनिश्चितताओं को देखते हुए नेपाल सरकार और पर्यटन बोर्ड अब अपने पर्यटन क्षेत्र को स्थिर और संतुलित बनाने के लिए वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह के वैश्विक संकटों के प्रभाव को कम किया जा सके।

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