पीट हेगसेथ, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान के साथ जंग में US ने बहाए 37.5 अरब डॉलर, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट में पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े

US Iran War: अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट को बताया कि ईरान के साथ संघर्ष में अब तक 37.5 अरब डॉलर खर्च हुए हैं। ट्रंप सरकार ने सैन्य तैयारी के लिए अरबों डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग की है।

अमन उपाध्याय

Pete Hegseth On US Iran War Cost: ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ जारी युद्ध के आर्थिक बोझ का आधिकारिक खुलासा करते हुए अमेरिकी संसद से भारी-भरकम आपातकालीन फंड की मांग की है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट की एप्रोप्रिएशन कमेटी को सूचित किया कि होर्मुज में फिर से शुरू हुई लड़ाई के बीच अब तक अनुमानित 37.5 अरब डॉलर का खर्च आ चुका है। इस वित्तीय दबाव को देखते हुए प्रशासन ने लगभग 88 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग का प्रस्ताव रखा है।

सुनवाई के दौरान हेगसेथ ने कहा कि 37.5 अरब डॉलर के इस आंकड़े में अब तक हुए वास्तविक खर्च के साथ-साथ 30 सितंबर तक के सैन्य वेतन, ऑपरेशन और रखरखाव के संभावित खर्च शामिल हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा मांगी गई 87.6 अरब डॉलर की कुल राशि में से लगभग 67 अरब डॉलर सीधे तौर पर सेना के लिए आवंटित किए जाएंगे।

आधुनिक हथियारों पर जोर

रक्षा विभाग की इस मांग का एक बड़ा हिस्सा सेना की ताकत को बनाए रखना है।  प्रस्ताव के अनुसार, 21 अरब डॉलर की राशि सैन्य वेतन, उपकरणों को बदलने, ईंधन और नेशनल गार्ड के सहयोग के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इसके अलावा, 46 अरब डॉलर का एक बड़ा हिस्सा गोला-बारूड के उत्पादन में तेजी लाने और हाइपरसोनिक हथियारों, काउंटर-ड्रोन सिस्टम व सैटेलाइट जैसी आधुनिक तकनीकियों में निवेश के लिए रखा गया है।

हेगसेथ ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस इस अतिरिक्त फंड को मंजूरी नहीं देती है, तो सेना को ट्रेनिंग एक्सरसाइज में कटौती करनी पड़ सकती है और हथियारों के घटते स्टॉक जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन फंडों के बिना सर्विस मेंबर्स को वेतन देने और जरूरी ऑपरेशनों को जारी रखने की क्षमता पर खतरा पैदा हो सकता है।

विपक्ष के खड़े किए कड़े सवाल

हालांकि, डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने इस भारी-भरकम मांग पर कड़े सवाल उठाए हैं। सीनेटर रिचर्ड डर्बिन और पैटी मरे ने सवाल किया कि जब पेंटागन के पास पिछले बजट से 75 बिलियन डॉलर का बिना इस्तेमाल हुआ फंड मौजूद है, तो और पैसे की क्या जरूरत है।

मरे ने यह भी बताया कि इस सप्लीमेंटल फंड में न केवल ईरान युद्ध, बल्कि दक्षिणी सीमा और वाशिंगटन में नेशनल गार्ड की तैनाती के लिए भी अरबों डॉलर मांगे गए हैं। उनका कहना है कि जनता टैक्स के अरबों डॉलर युद्ध में झोंकने के बजाय इसका रणनीतिक अंत चाहती है।

जमीनी सेना की तैनाती पर टिप्पणी

सुनवाई में 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' को लेकर भी बहस हुई। सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने याद दिलाया कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के राष्ट्रपति को 60 दिनों के भीतर लड़ाई खत्म करनी होती है। इसके जवाब में हेगसेथ ने कहा कि प्रशासन का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास इसके लिए जरूरी संवैधानिक अधिकार हैं।

वहीं, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने जमीनी सेना की तैनाती पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि सेना हर स्थिति के लिए विकल्प तैयार कर रही है।

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