

Iran America War US Army Attacks Iranian Drone Storage Sites: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही भयंकर जंग अब एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान पर भीषण हवाई हमले किए हैं। इस बड़े सैन्य ऑपरेशन में ईरान के एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट और सैन्य लॉजिस्टिक्स को निशाना बनाया गया। अमेरिका का मुख्य मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को काफी कमजोर करना और होर्मुज स्ट्रेट में शांति कायम करना है।
यह बहुत बड़ी सैन्य कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में एक व्यावसायिक शिप पर किए गए हमले के तुरंत बाद हुई है। अमेरिकी रक्षा कमांड सेंटकॉम ने बताया कि ईरान पिछले तीन महीनों में 30 से ज्यादा जहाजों पर हमला कर चुका है। इन हमलों से सैकड़ों नाविकों की जान खतरे में पड़ी है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि व्यापारिक जहाजों के लिए यह समुद्री रास्ता अभी भी पूरी तरह से खुला हुआ है।
ईरान भी अमेरिका के इन बड़े सैन्य हमलों का लगातार बहुत ही कड़ा और आक्रामक जवाब दे रहा है। मंगलवार को उसने होर्मुज स्ट्रेट में एक बड़े तेल टैंकर पर भारी मिसाइल से हमला किया था। इसके अलावा बहरीन और कुवैत जैसे पड़ोसी देशों में भी मिसाइल हमलों की चेतावनी के लिए तेज सायरन बजे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ कहा है कि फिलहाल ईरान के साथ बातचीत में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है।
इस भयंकर युद्ध का सीधा और बहुत ही नकारात्मक असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत भारी उछाल के साथ 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। अमेरिका में भी पेट्रोल की औसत कीमत काफी बढ़कर करीब 4 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है। महंगे ईंधन और बढ़ती भारी सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी सरकार पर काफी ज्यादा राजनीतिक दबाव भी अब तेजी से बढ़ता जा रहा है।
एसोसिएटेड प्रेस की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक इस बड़े संघर्ष में घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 के पार हो गई है। यह बहुत बड़ा आंकड़ा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के आधिकारिक रिकॉर्ड से भी काफी ज्यादा बताया जा रहा है। अमेरिका में जल्द ही मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं, जिसके कारण वहां की घरेलू राजनीति बहुत ज्यादा गर्म हो गई है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही ईरान के यूरेनियम संवर्धन केंद्रों के करीब भी नए सैन्य हमले हो सकते हैं।