अमेरिका-ईरान तनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

हूती से हिज्बुल्लाह तक... ईरान के 'प्रॉक्सी वॉरियर' खोलेंगे मोर्चा, मिडिल ईस्ट में शुरू होने वाला है महायुद्ध!

US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की योजना बना रहे हैं, जबकि ईरान ने भीषण जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

अमन उपाध्याय

US Attack On Iran:  मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है क्योंकि अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। हाल ही में, अमेरिका ने एक और युद्धपोत को तैनात किया है, जबकि एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पहले से ही वहां मौजूद है।

पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ के अनुसार, अमेरिकी सेना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के किसी भी आदेश को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान के परमाणु ठिकाने, मिसाइल भंडार और वहां की सरकार को निशाना बनाना है।

क्या है ईरान की सैन्य क्षमता?

ईरान पिछले 50 वर्षों से अमेरिका और इजरायल जैसे दुश्मनों के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान भले ही तकनीकी रूप से अमेरिका से कमजोर लगे, लेकिन उसके पास भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता है। ईरान के पास 2000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का विशाल भंडार है। ईरान की सेना ने स्पष्ट किया है कि यदि हमला हुआ तो उसका जवाब तत्काल और भयानक होगा, जिसमें अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को मिसाइल से निशाना बनाना भी शामिल है।

अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मंडराता खतरा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्वीकार किया है कि मिडिल ईस्ट में तैनात 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक सीधे तौर पर ईरानी ड्रोन और शॉर्ट-रेंज मिसाइलों की रेंज में हैं। बहरीन, कतर और जॉर्डन में स्थित प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डे ईरान के निशाने पर हो सकते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

होर्मुज की जलडमरूमध्य युद्ध की स्थिति में ईरान का सबसे घातक विकल्प होर्मुज की जलडमरूमध्य में माइंस बिछाना हो सकता है। यह एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है जहां से दुनिया का लगभग 20-25 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का निर्यात होता है। यदि ईरान इस मार्ग को बाधित करता है, तो वैश्विक शिपिंग लाइन्स और अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगेगा।

प्रॉक्सी वार और कूटनीतिक विकल्प

ईरान सीधे हमले के साथ-साथ अपने प्रॉक्सी संगठनों जैसे हूती और हिज्बुल्लाह के जरिए लाल सागर और सीरिया-इराक में नए मोर्चे खोल सकता है। हालाँकि, कतर और तुर्की जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरानी नेतृत्व केवल उन्हीं शर्तों पर समझौता करने को तैयार होगा जो शासन के मूल स्तंभों (मिसाइल निर्माण और प्रॉक्सी समर्थन) को प्रभावित न करें।

Explainer: कब-कब विवादों में घिरे धीरेंद्र शास्त्री? 10 बयानों पर हुआ विरोध, कई बार मांगनी पड़ी माफी

Diwali Trains: मुंबई-नागपुर के बीच 12 और स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, 4 नवंबर से शुरू होगी बुकिंग; जानिए शेड्यूल

राहुल ने PM मोदी को दी खुली चुनौती: बोले- डरिए मत, मंच पर आमने-सामने बैठिए; राजनाथ-समेत 4 नेताओं से की अपील

SIR: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब तो भी भर सकेंगे फॉर्म-6, चुनाव आयोग ने दी बड़ी राहत

दिवाली-छठ पर यूपी-बिहार वालों को ट्रेनों में मिल सकता है कन्फर्म टिकट, रेलवे चला रहा करीब 2,000 स्पेशल ट्रेनें