Donald Trump Rejects Iran Peace Proposal Explainer: मीडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने ईरान के इस जवाबी प्रस्ताव को Totally Unacceptable करार देते हुए तेहरान पर शांति के नाम पर खेल खेलने का आरोप लगाया है। इस फैसले के बाद दुनिया भर के तेल बाजारों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता और युद्ध का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ईरान पिछले 47 वर्षों से अमेरिका और पूरी दुनिया के साथ खेल खेल रहा है लेकिन अब वे और नहीं हंस पाएंगे। ईरान ने यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से मध्यस्थ के तौर पर भेजा था, जो ट्रंप द्वारा पहले दिए गए एक प्रस्ताव का जवाब था। हालांकि, ट्रंप ने इसे पढ़ने के दो घंटे के भीतर ही खारिज कर दिया।
8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम तो चल रहा है, लेकिन शांति की बातचीत अब रुकती हुई नजर आ रही है, इसलिए इस विवाद के मुख्य कारणों को समझना जरूरी है। तो आइए जानते वो मुख्य बिंदु क्या है:
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ट्रंप की शर्त है कि ईरान सबसे पहले होर्मुज को खोले, जहां से दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात का पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान ने फरवरी से ही अमेरिका- इजरायल के हमलों के जवाब में यहां नाकेबंदी लगा रखी है।
परमाणु कार्यक्रम: ट्रंप ने ईरान की परमाणु क्षमता को एक 'रेड लाइन' घोषित किया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने पूरे यूरेनियम का भंडार उसे सौंप दे और यूरेनियम संवर्धन का काम पूरी तरह बंद कर दे।
युद्ध का दायरा: ईरान चाहता है कि शांति समझौता केवल उसके साथ नहीं बल्कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर हो, जहां इजरायल लगातार हमले कर रहा है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने डोनाल्ड ट्रंप की मांग को गलत बताया है और कहा है कि उनका प्रस्ताव शांति के लिए बिल्कुल सही और व्यावहारिक था। ईरान का कहना है कि वे युद्ध खत्म करना चाहते हैं लेकिन इसके लिए उन्होंने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले उन पर लगी पाबंदियां हटाए और उसके जमे हुए विदेशी फंड को रिलीज करे।
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जानकारों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी ताकतवर छवि बनाए रखने की जिद में बातचीत के रास्ते बंद कर रहे हैं क्योंकि वे किसी भी समझौते में कमजोर नहीं दिखना चाहते है। वहीं, राजनीतिक वैज्ञानिक क्रिस फेदरस्टोन के अनुसार, अगर कूटनीति काम नहीं आई, तो ट्रंप ईरान पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा सकते हैं या होर्मुज के इलाके में सीमित सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुन सकते हैं।