

Iran Responds US Peace Proposal Pakistan: मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। ईरान ने आखिरकार अमेरिका द्वारा भेजे गए 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तेहरान ने अपना यह संदेश सीधे वॉशिंगटन को न भेजकर पाकिस्तान के जरिए भेजा है, जो इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव को समाप्त करने के लिए एक पन्ने का 14-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य वर्तमान सैन्य तनाव को रोकना और वॉशिंगटन-तेहरान के बीच औपचारिक कूटनीतिक वार्ता की शुरुआत करना है। इस संभावित समझौते के तहत ईरान को अपनी परमाणु संवर्धन गतिविधियों पर रोक लगानी होगी। इसके बदले में, अमेरिका न केवल ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है बल्कि उसकी फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्ति को भी वापस जारी कर सकता है।
शांति वार्ता की इन कोशिशों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ईरान कभी भी दुश्मन के सामने सिर नहीं झुकाएगा। पेजेशकियान के अनुसार, बातचीत का मतलब 'आत्मसमर्पण' या पीछे हटना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ईरान के अधिकारों को कायम रखना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी समझौते के दौरान ईरान की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जाएगा।
भले ही कूटनीतिक गलियारों में शांति की बातें चल रही हों लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुई यह जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। वहीं, मीडिल ईस्ट में धमकियों का दौर भी जारी है। ब्रिटेन ने भी सुरक्षा के मद्देनजर पश्चिम एशिया में अपना युद्धपोत तैनात कर दिया है, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के खतरे पर कतर के प्रधानमंत्री से मुलाकात की है।
ईरान के भीतर भी सैन्य तैयारी कम नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सैन्य अभियानों को आगे बढ़ाने और दुश्मनों का मजबूती से सामना करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, इजरायल द्वारा इराक की धरती से ईरान के खिलाफ किसी सीक्रेट मिशन की तैयारी की खबरें भी सामने आ रही हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना कठिन है कि शांति प्रस्ताव पर ईरान का यह जवाब युद्ध को पूरी तरह से रोक पाएगा या नहीं, लेकिन पाकिस्तान की मध्यस्थता ने एक बार फिर कूटनीतिक समाधान की खिड़की खोल दी है।