मास्को में गरजे प्रो. धीरज सिंह: बोले- वैश्विक शासन को दिशा दिखा रहा है भारतीय लोकतंत्र और नागरिक समाज

World Public Assembly: सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रोफेसर धीरज सिंह ने कहा कि किसी भी देश की वास्तविक ताकत केवल सरकारी तंत्र में नहीं, बल्कि उसके नागरिक संस्थानों में निहित होती है।
Prof. Dhiraj Singh in the panel with Prof. Fidel-Antonio Smirnov
पैनल में शामिल प्रो. धीरज सिंहसोर्स- नवभारत ब्यूरो)
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2nd World Public Assembly: बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच मास्को के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित 'दूसरे विश्व जन सभा' (World Public Assembly - WPA) में भारत के विचारशील नेतृत्व की छाप देखने को मिली। बेनेट यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर मीडिया एंड टेक्नोलॉजी के प्रमुख और टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया के डिप्टी डीन प्रो. धीरज सिंह ने सम्मेलन में एक प्रभावशाली संबोधन दिया।

उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत का लोकतंत्र और उसका नागरिक समाज आज पूरे विश्व के लिए शासन प्रणाली का एक सशक्त खाका (ब्लूप्रिंट) पेश कर रहा है।

वैश्विक दिग्गजों के साथ साझा किया मंच

प्रो. धीरज सिंह ने क्यूबा के दिग्गज नेता फिदेल कास्त्रो के पोते व प्रमुख शिक्षाविद प्रो. फिदेल-एंटोनियो स्नोव के साथ एक उच्च स्तरीय पैनल में भाग लिया। इस परिचर्चा में रूस, चीन, पोलैंड, क्यूबा, कजाकिस्तान और पेरू के प्रतिनिधियों ने नागरिक कूटनीति तथा जनता द्वारा संचालित शासन के भविष्य पर अपने विचार साझा किए।

पांच ऐतिहासिक कानूनों का दिया उदाहरण

प्रो. धीरज सिंह ने कहा कि किसी भी देश की वास्तविक ताकत केवल सरकारी तंत्र में नहीं, बल्कि उसके नागरिक संस्थानों में निहित होती है। उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां के जन-आंदोलनों और नागरिक समाज के प्रयासों के कारण ही देश में शासन व्यवस्था को क्रांतिकारी रूप से बदलने वाले पांच ऐतिहासिक कानून लागू हो सके:

  • सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम (2005)

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) (2005)

  • शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम (2009)

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013)

  • लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम (2013)

  • लोक सभा टीवी के अनुभव और संस्थागत त्रिकोण का महत्व

जन-संवाद और संसदीय मंशा से राष्ट्र निर्माण

लोक सभा टीवी (अब संसद टीवी) के पूर्व कार्यकारी निदेशक के अपने अनुभवों को साझा करते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि जब जन-संवाद और संसदीय मंशा एक दिशा में मिलते हैं, तो राष्ट्र की प्रगति और तेज हो जाती है। उन्होंने 'नागरिक समाज, मीडिया और विधान' को एक ऐसा मजबूत संस्थागत त्रिकोण बताया जो पारदर्शिता, जवाबदेही और समृद्धि सुनिश्चित करता है। उन्होंने इसे भारत की एक असाधारण संपत्ति बताया जिससे दुनिया के अन्य देशों को सीख लेनी चाहिए।

With the international delegates in national dress
राष्ट्रीय पोशाक में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ(सोर्स- नवभारत ब्यूरो)
Prof. Dhiraj Singh in the panel with Prof. Fidel-Antonio Smirnov
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5000 प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ आयोजन

मास्को में 18-19 सितंबर 2026 को आयोजित इस सेकेंड वर्ल्ड पब्लिक एसेंबली में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया सहित 164 से अधिक देशों के 5000 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, भारत की पूर्व विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के महासचिव नूर्लान येरमेकबायेव जैसे प्रमुख नेता भी शामिल हुए।

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