Trump Board of Peace Signatories: स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और वैश्विक स्तर पर चर्चा बटोरने वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' के पहले चार्टर का औपचारिक उद्घाटन और हस्ताक्षर समारोह कराया। यह अंतरराष्ट्रीय निकाय विशेष रूप से वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
हालांकि इसकी शुरुआत इजरायल-हमास युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण और शासन की निगरानी के लिए हुई थी, लेकिन अब ट्रंप ने इसका दायरा बहुत बड़ा कर दिया है।
इस बोर्ड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं इसकी अध्यक्षता संभालने की घोषणा की है और चार्टर के अनुसार, वे इसे जीवन भर संभाल सकते हैं। भविष्य में वह किसी अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति को इस पद के लिए नामित भी कर सकते हैं। ट्रंप ने इस बोर्ड को 'सबसे प्रभावशाली' और काम पूरा करने वाले नेताओं का समूह बताया है। दिलचस्प बात यह है कि इस बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का मूल्य टैग लगाया गया है।
ट्रंप के इस नए शांति बोर्ड को मुस्लिम देशों का जबरदस्त समर्थन मिला है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई, और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो सहित करीब 20 देशों ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। सदस्य देशों की सूची में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, कतर, तुर्की और इजरायल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। ट्रंप का दावा है कि अब तक लगभग 35 देश इस परियोजना में शामिल होने पर सहमत हो चुके हैं।
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बावजूद भारत ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किए जाने के बावजूद भारत ने फिलहाल इससे दूरी बनाए रखी है। चीन ने भी स्पष्ट रूप से इस बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
वहीं, ब्रिटेन, फ्रांस, और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को कमजोर करने की आशंका और इसमें रूस की संभावित भागीदारी के कारण हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है। ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर ने विशेष रूप से राष्ट्रपति पुतिन की भागीदारी पर चिंता व्यक्त की है।
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ट्रंप ने खुले तौर पर कहा है कि यह बोर्ड अब तक का सबसे प्रतिष्ठित होगा और उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के कुछ कार्यों को बदलने और अंततः उसे अप्रासंगिक बनाने की दिशा में एक कदम के रूप में पेश किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि UN को जारी रहना चाहिए, लेकिन बोर्ड सुंदर ढंग से अपना काम पहले ही शुरू कर चुका है।