

RBI Rejects Tata Sons Application: भारत का केंद्रीय बैंक (RBI) ने टाटा संस की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी का लाइसेंस सरेंडर करने की अर्जी को खारिज कर दिया है। आरबीआई ने कहा इस अर्जी को 'मंजूर नहीं किया जा सकता'। इस फ़ैसले से कंपनी अब स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने के और करीब आ गई है। टाटा संस ने RBI में कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए अर्ज़ी दी थी, क्योंकि कुछ नियमों के तहत उसे लिस्ट होना पड़ सकता था।
टाटा संस को 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' के तौर पर रखा गया गया है और यह नॉन-बैंक लेंडर्स के लिए RBI के नियमों के दायरे में आती है। इन नियमों के तहत, 1 ट्रिलियन रुपये से ज़्यादा संपत्ति वाली कंपनियों, या पब्लिक फंड तक सीधी या अप्रत्यक्ष पहुंच वाली कंपनियों के लिए लिस्ट होना ज़रूरी है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक, टाटा संस की स्टैंडअलोन एसेट्स कुल 1.75 ट्रिलियन रुपये थीं।
RBI ने शनिवार को एक पत्र के ज़रिए यह फ़ैसला दिया है। जानकारी के मुताबिक अब तक टाटा संस अनलिस्टेड रही है। लेकिन इस साल स्टेकहोल्डर्स, जिसमें दूसरा सबसे बड़ा शेयरहोल्डर शापूरजी पलोनजी ग्रुप भी शामिल है। उसकी ओर से कंपनी को पब्लिक करने का दबाव बढ़ा है। पिछले महीने, टाटा संस ने कहा कि उसके चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते हैं। जिसकी वजह से ग्रुप में अनिश्चितता का माहौल है।
आरबीआई द्वारा जारी 2022 के एक सर्कुलर के अनुसार स्केल-बेस्ड रेगुलेशन के तहत टाटा संस और दूसरी बड़ी NBFCs को पिछले साल सितंबर तक लिस्ट होने के लिए कहा गया था। लेकिन टाटा संस ने डी-रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया था, क्योंकि इसकी ज़्यादातर हिस्सेदारी चैरिटेबल ट्रस्ट के पास थी, यह पब्लिक फंड नहीं जुटा रही थी और सिर्फ़ एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी थी। RBI एक साल से ज़्यादा समय तक चुप रहा और इस साल अगस्त की शुरुआत में उसने 2026-27 के लिए NBFCs की एक लिस्ट जारी की, जिसमें टाटा संस भी शामिल थी। इन कंपनियों पर कम से कम पांच साल तक कड़े रेगुलेटरी नियम लागू होंगे और पहचान होने के तीन साल के अंदर लिस्ट होना जरूरी होगा।