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तस्लीमा नसरीन ने की शेख हसीना की वतन वापसी की वकालत, बोलीं अवामी लीग पर बैन हटाए सरकार

Taslima Nasreen Bangladesh Crisis: तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में शेख हसीना की वापसी और अवामी लीग से बैन हटाने की मांग की। उन्होंने यूनुस सरकार में हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों पर भी चिंता जताई।

अनन्या तिवारी

Taslima Nasreen Statement On Sheikh Hasina: निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने पड़ोसी देश बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। नसरीन ने मांग की है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश लौटने की अनुमति दी जानी चाहिए और उनकी पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाया जाना चाहिए।

शेख हसीना को हटाना अलोकतांत्रिक

तसलीमा नसरीन ने कहा कि जिस तरह से शेख हसीना को सत्ता से बेदखल किया गया, वह पूरी तरह से गलत और अलोकतांत्रिक था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि वह अतीत में शेख हसीना की नीतियों की आलोचक रही हैं, लेकिन किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाना लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है। नसरीन के अनुसार, अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने का पूरा अवसर मिलना चाहिए और शेख हसीना को देश वापस आकर अपनी पार्टी का नेतृत्व करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ पर बड़ा दावा

बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए लेखिका ने कहा कि वहां कट्टरपंथी समूहों का प्रभाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों की संसद में मौजूदगी बढ़ने वाली है। नसरीन का मानना है कि यदि अवामी लीग मुख्य विपक्षी दल के रूप में बनी रहती, तो यह देश के लोकतंत्र के लिए बेहतर होता।

अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और नई सरकार पर निशाना

तसलीमा नसरीन ने वर्तमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यूनुस के कार्यकाल में हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं और सरकार इन अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मदरसों में गैर-मुस्लिमों के प्रति नफरत फैलाई जा रही है, जिससे वहां रह रहे हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों को भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

भारत के साथ संबंधों और खुद के निर्वासन पर दर्द

भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए तसलीमा नसरीन ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के रिश्ते भविष्य में और बेहतर होंगे। उन्होंने बांग्लादेश की आजादी में भारत के योगदान को अतुलनीय बताया। हालांकि, उन्होंने भावुक होते हुए यह भी कहा कि भले ही वह दूसरों की वापसी की बात कर रही हैं, लेकिन उन्हें खुद अपने वतन वापस लौटने के लिए किसी ने नहीं कहा है। गौरतलब है कि तस्लीमा नसरीन को खुद शेख हसीना के शासनकाल के दौरान ही बांग्लादेश से निर्वासित होना पड़ा था।

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