न्याय के लिए दिल्ली आने की जरूरत नहीं होनी चाहिए, CJI सूर्यकांत ने क्यों कही यह बात?

CJI Surya Kant Speech: CJI सूर्यकांत ने हाई कोर्ट में लंबित मामलों की जल्द सुनवाई की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि समय पर न्याय पाने के लिए किसी को दिल्ली आने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
CJI Suryakant
CJI सूर्यकांत (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • CJI सूर्यकांत ने हाई कोर्ट में लंबित मामलों की जल्द सुनवाई पर जोर दिया।

  • उन्होंने जरूरी मामलों की पहचान और सुनवाई की तारीख तय करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की बात कही।

  • CJI ने कहा कि न्याय पाने के लिए किसी व्यक्ति को दिल्ली आने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

CJI Surya Kant High Court Statement: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट में लंबित मामलों की जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने वाले याचिकाकर्ताओं की बढ़ती संख्या न्याय व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश पर विचार करने का मौका देती है। CJI ने सवाल उठाया कि क्या जरूरी मामलों की पहचान और सुनवाई की तारीख तय करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है।

रविवार को कोच्चि में केरल हाई कोर्ट की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में CJI सूर्यकांत ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को समय पर न्याय पाने के लिए दिल्ली तक आने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। भारत की संवैधानिक न्याय व्यवस्था सिर्फ नई दिल्ली तक सीमित नहीं है।

हाई कोर्ट को लेकर क्या कहा CJI ने?

CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा हाई कोर्ट की संस्थागत स्वतंत्रता और अपने मामलों की सुनवाई का क्रम तय करने के अधिकार का सम्मान किया है। इसके बावजूद हाई कोर्ट में लंबित मामलों की जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले याचिकाकर्ताओं की बढ़ती संख्या पर विचार करना जरूरी है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या जरूरी मामलों की पहचान बेहतर तरीके से की जा सकती है? क्या सुनवाई की तारीख तय करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है? क्या तकनीक की मदद से उन मामलों को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिनमें देरी से किसी पक्ष को ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई संभव न हो?

नागरिक अधिकारों की रक्षा करना हाई कोर्ट की जिम्मेदारी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देशभर में मौजूद 25 हाई कोर्ट भारतीय न्याय व्यवस्था की मजबूती का आधार हैं। इन अदालतों की जिम्मेदारी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और कानून का शासन बनाए रखना है।

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उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट स्थानीय लोगों की भाषा, क्षेत्रीय समस्याओं और सरकारी फैसलों के असर को बेहतर तरीके से समझते हैं। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट को कानूनी, प्रशासनिक और सरकारी मामलों में प्रभावी राहत देने का अधिकार प्राप्त है।

CJI ने यह भी कहा कि कई बार न्याय मिलने का फैसला अंतिम सुनवाई से पहले इस बात पर निर्भर करता है कि जरूरत के समय अदालत ने अंतरिम राहत दी या नहीं।

केरल हाई कोर्ट की न्यायिक परंपरा का किया जिक्र

केरल हाई कोर्ट की स्थापना के 75 साल पूरे होने पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि केरल राज्य और हाई कोर्ट दोनों की स्थापना 1956 में हुई थी। पिछले सात दशकों में दोनों का विकास एक-दूसरे से जुड़ा रहा है। इस दौरान हाई कोर्ट ने राज्य के संवैधानिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के फैसलों ने नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने के साथ यह भी सुनिश्चित किया कि सरकारी शक्तियों का इस्तेमाल कानून के दायरे में हो।

CJI ने केरल हाई कोर्ट की पुरानी न्यायिक परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि मौजूदा केरल क्षेत्र में पहले त्रावणकोर और कोचीन की अदालतें थीं। इसके बाद 1887 में त्रावणकोर हाई कोर्ट और 1949 में त्रावणकोर-कोचीन हाई कोर्ट की स्थापना हुई। इन संस्थाओं ने मौजूदा केरल हाई कोर्ट की नींव तैयार करने में योगदान दिया।