Bangladesh Violence Report 2026: बांग्लादेश में 3 महीनों में 74 लोगों की हत्या, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

Bangladesh Political Violence: बांग्लादेश में मानवाधिकार संगठन 'अधिकार' की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 के बीच भीड़ हिंसा और राजनीतिक संघर्षों में 74 लोगों की मौत हो गई।
Bangladesh Violence Report 2026: 74 people killed in Bangladesh in 3 months, questions raised on law and order
बांग्लादेश में 3 महीने में भीड़ हिंसा और राजनीतिक संघर्षों में 74 लोगों की मौत हुई, (सोर्स-आईएएनएस)
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Bangladesh Violence Human Rights Report 2026: बांग्लादेश में अप्रैल से जून 2026 के बीच हिंसा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर मानवाधिकार संगठन अधिकार की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस तीन महीने की अवधि में भीड़ हिंसा और राजनीतिक संघर्षों में कुल 74 लोगों की मौत हुई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। संगठन का कहना है कि भीड़ द्वारा की गई अधिकांश हत्याएं चोरी, डकैती या धार्मिक भावनाएं आहत करने के संदेह में की गईं, जो न्याय व्यवस्था पर लोगों के घटते भरोसे की ओर संकेत करती हैं।

रिपोर्ट में राजनीतिक दलों के भीतर गुटबाजी, जबरन वसूली और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर बढ़ते संघर्षों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराध, कथित न्यायेतर हत्याएं, जेलों में क्षमता से दोगुने कैदियों की मौजूदगी और पत्रकारों पर हमलों को भी प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने रखा गया है। मानवाधिकार संगठन ने सरकार से स्वतंत्र जांच, जवाबदेही तय करने और कानून के शासन को मजबूत करने की मांग की है ताकि हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

भीड़ हिंसा पर गंभीर चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ द्वारा मारे गए अधिकांश लोगों पर चोरी या डकैती का संदेह था। कुछ लोगों की हत्या गांवों में होने वाली अनौपचारिक पंचायतों (सलिश) के दौरान या धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में की गई। संगठन ने कहा कि यह स्थिति कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर लोगों के घटते भरोसे को दर्शाती है, जिसके कारण लोग खुद कानून हाथ में ले रहे हैं।

राजनीतिक गुटबाजी बनी वजह

वहीं रिपोर्ट में आगे बताया गया कि इस अवधि में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के भीतर आपसी संघर्ष की 57 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) में दो घटनाएं सामने आईं। बीएनपी की अंदरूनी गुटबाजी में चार लोगों की मौत हुई और 400 लोग घायल हुए, जबकि एनसीपी के आंतरिक संघर्ष में 16 लोग घायल हुए। बीएनपी के भीतर विवाद जबरन वसूली, क्षेत्रीय वर्चस्व, खुदाई की मिट्टी की बिक्री, स्थानीय चुनाव टिकट, पार्टी सम्मेलन और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर थे। कई घटनाओं में आग्नेयास्त्र और अन्य घातक हथियारों का इस्तेमाल भी किया गया।

तीन महीने में 74 मौतें

मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि बीएनपी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरन वसूली, जमीन कब्जाने, अपहरण, दुष्कर्म, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों पर हमले, पुलिस के काम में बाधा डालने और राजनीतिक विरोधियों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठन 'अधिकार' की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-जून 2026 के दौरान भीड़ हिंसा और राजनीतिक संघर्षों में 74 लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराध, जेलों में भीड़भाड़ और पत्रकारों पर हमलों को भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया।

महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े

रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराध पर भी चिंता जताई गई है। अप्रैल-जून के दौरान 255 दुष्कर्म पीड़ितों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जिनमें 93 महिलाएं और 161 लड़कियां शामिल थीं। संगठन ने कहा कि डीएनए जांच की सीमित सुविधा, मेडिकल रिपोर्ट में देरी, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा का अभाव तथा अदालतों में लंबित मामलों के कारण दुष्कर्म पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।

हिरासत में प्रताड़ना से मौत

बता दें कि रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कथित तीन न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग) का भी उल्लेख किया गया है। इनमें एक व्यक्ति की कथित तौर पर डिटेक्टिव ब्रांच की हिरासत में यातना से मौत, एक व्यक्ति की मादक पदार्थ नियंत्रण विभाग की कार्रवाई के दौरान पिटाई से मौत और एक मछुआरे की वन विभाग की गश्ती टीम द्वारा गोली मारकर हत्या शामिल है।

जेलों में क्षमता से दोगुने कैदी

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, 17 मई तक बांग्लादेश की 75 जेलों में उनकी क्षमता 43,157 के मुकाबले 85,000 से अधिक कैदी बंद थे। इस दौरान बीमारी के कारण 16 कैदियों की मौत हुई। संगठन ने जेलों में भीड़भाड़, अपर्याप्त भोजन और डॉक्टरों की कमी को गंभीर समस्या बताया।

पत्रकारों पर हमलों का उल्लेख

मानवाधिकार संगठन ने यह भी कहा कि इस अवधि में पत्रकारों पर हमलों की कई घटनाएं हुईं। 17 पत्रकार घायल, पांच के साथ मारपीट, चार पर हमले और सात को धमकियां दी गईं। रिपोर्ट के अंत में अधिकार ने न्यायेतर हत्याओं, हिरासत में यातना और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

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