सीरिया के दक्षिणी स्वेइदा प्रांत में एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी (फोटो- सोशल मीडिया) 
विदेश

मशीनगनों की गूंज, धमाके... सीरिया में फिर भड़की हिंसा; अमेरिकी कोशिशें भी नाकाम

Syria-Druze Conflictसीरियाई सेना ने अब स्वेइदा से काफी हद तक अपनी टुकड़ियां हटा ली हैं, लेकिन इसी दौरान ड्रूज लड़ाकों द्वारा बेदुइन बस्तियों पर बदले की कार्रवाई की खबरें भी सामने आईं है।

सौरभ शर्मा

Syria-Druze Crisis: सीरिया के दक्षिणी स्वेइदा प्रांत में एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी है। इस हफ़्ते, पूरे इलाके में भारी मशीनगनों और मोर्टार के धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि अमेरिकी युद्धविराम के प्रयास भी नाकाम रहे। स्थिति बिगड़ती देख, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से सीरियाई सेना से जिहादियों की घुसपैठ और "नरसंहार" को रोकने का आग्रह किया।

यह संघर्ष पिछले रविवार को शुरू हुआ जब लंबे समय से चला आ रहा तनाव ड्रूज मिलिशिया और सुन्नी बेदुइन जनजातियों के बीच खुली लड़ाई में बदल गया। सीरियाई सेना ने शुरू में स्थिति को नियंत्रण में करने का दावा किया, लेकिन जल्द ही वे बेदुइन पक्ष का समर्थन करते दिखाई दिए, जिससे ड्रूज समुदाय और भी भड़क गया।

सीरियाई सेना के सैनिक स्‍वेइदा से हटे

सीरिया के सूचना मंत्री हमजा अल-मुस्तफा ने कहा कि स्थिति को स्थायी संघर्ष में बदलने से रोकने, मौजूदा झड़पों को रोकने और राजनीतिक समाधान का रास्ता खोलने के लिए युद्धविराम की घोषणा की गई है।

इस बीच, इजराइल ने दमिश्क में लक्षित हवाई हमले किए, और कहा कि इसका उद्देश्य ड्रूज नागरिकों की रक्षा करना है। सीरियाई सेना ने अब स्वेदा से अपने सैनिकों को काफी हद तक वापस बुला लिया है, लेकिन ड्रूज लड़ाकों द्वारा बेडौइन बस्तियों पर जवाबी कार्रवाई की खबरें आई हैं।

शत्रु कबीलों को जिम्मेदार ठहराया गया

अपने टेलीविजन संबोधन में, राष्ट्रपति अल-शरा ने इस अभूतपूर्व संकट के लिए "अवैध समूहों और शत्रु कबीलों" को ज़िम्मेदार ठहराया सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, अब तक 940 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सिर्फ़ एक हफ़्ते में 80,000 लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। चूंकि संघर्ष में कूटनीति पीछे छूट रही है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह युद्धविराम इस सांप्रदायिक आग को रोक पाएगा?

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पश्चिम एशिया में शांति लाने के दावे जमीनी स्तर पर सच साबित नहीं हो रहे हैं। गाजा से लेकर यमन और लेबनान से लेकर ईरान और अब सीरिया तक, पूरा क्षेत्र अस्थिरता और खून-खराबे की चपेट में है।

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