दुनिया में तेल संकट, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

तैयार रहें! अप्रैल से तेल के लिए तरसेंगे दुनिया के कई देश, एशिया के बाद अब अमेरिका-यूरोप की बारी

Oil Crisis News: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप है। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एशिया, यूरोप और अमेरिका को गंभीर तेल संकट और बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ेगा। 

अमन उपाध्याय

Strait Of Hormuz Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव के बीच Strait of Hormuz के बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिकी वित्तीय दिग्गज जेपी मॉर्गन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आने वाला अप्रैल महीना तेल की आपूर्ति के लिहाज से बेहद भयावह होने वाला है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी हमलों के कारण इस सामरिक मार्ग से तेल का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है जिसका असर अब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में महसूस होने लगा है।

एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया पर सबसे ज्यादा मार

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस संकट की पहली और सबसे कड़ी मार एशिया पर पड़ेगी। सामान्यतः फारस की खाड़ी से तेल का शिपमेंट एशिया पहुंचने में 10 से 20 दिन का समय लगता है। चूंकि आखिरी तेल टैंकर 28 फरवरी को इस मार्ग से निकला था और युद्ध से पहले के वे शिपमेंट अब लगभग खत्म हो चुके हैं इसलिए एशिया को सबसे पहले आपूर्ति में दबाव महसूस होगा। विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में तेल निर्यात में महीने-दर-महीने 41 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब चुनौती केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है बल्कि यह बाजार में तेल की भौतिक उपलब्धता की समस्या बन गई है।

अफ्रीका और यूरोप में बढ़ता दबाव

एशिया के बाद अप्रैल की शुरुआत से अफ्रीका में इसका असर बढ़ेगा। तनाव के शुरुआती संकेत केन्या में दिखने लगे हैं, जहां रिटेल स्तर पर ईंधन की कमी हो रही है हालांकि तंजानिया के पास फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। वहीं, यूरोप को अप्रैल के मध्य तक इस झटके का अहसास होने की संभावना है। हालांकि, यूरोप के पास एक मजबूत इन्वेंट्री बफर और अटलांटिक बेसिन से वैकल्पिक आपूर्ति के रास्ते उपलब्ध हैं जो उसे इस संकट से लड़ने में कुछ हद तक मदद करेंगे।

अमेरिका और कैलिफोर्निया की चुनौतियां

इस वैश्विक श्रृंखला में अमेरिका को सबसे आखिर में झटका लगेगा क्योंकि खाड़ी देशों से तेल को वहां पहुंचने में लगभग 35 से 45 दिन का समय लगता है। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का घरेलू उत्पादन काफी अधिक है इसलिए उसे शायद कम समय के लिए भौतिक किल्लत का सामना न करना पड़े लेकिन आम जनता को तेल की ऊंची कीमतों का सामना जरूर करना पड़ेगा। रिपोर्ट में विशेष रूप से कैलिफोर्निया का जिक्र किया गया है जो आपूर्ति श्रृंखला की इन चुनौतियों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील और कमजोर स्थिति में है।

मिडिल ईस्ट में युद्ध का व्यापक असर

होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि एक वैश्विक आर्थिक खतरा बन चुका है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक अवरुद्ध रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं जिससे परिवहन और उत्पादन लागत में भारी वृद्धि होगी। फिलहाल, पूरी दुनिया अप्रैल में होने वाले संभावित बदलावों और तेल स्टॉक की स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है।

PM मोदी-ट्रंप की फोन पर बात, भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर क्या हुई चर्चा?

हवा में चाकूबाजी, तेजी से नीचे आया विमान…कौन हैं भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार? जान पर खेलकर बचाई 180 की जान

यूपी पुलिस को ही भंग कर सभी केस CBI को देने पड़ेंगे क्या? सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

कांग्रेस की एकला चलो नीति पर भड़के उद्धव ठाकरे! INDIA गठबंधन की बैठक में सुनाई खरी-खोटी, दी ये सलाह

CSR घाेटाला: महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों के 8 ठिकानों पर ED की छापेमारी, फर्जी नेटवर्क का खुलासा