पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

मुल्क की तबाही के लिए मुशर्रफ जिम्मेदार! PAK रक्षा मंत्री बोले- अमेरिका की कठपुतली बनने का मिला ये अंजाम

Khawaja Asif US statement: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने हितों के लिए हमेशा पाकिस्तान का इस्तेमाल किया।

अमन उपाध्याय

US Pakistan Relations: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली (संसद) में अमेरिका के साथ पाकिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तों को लेकर एक कड़ा और विवादित बयान दिया है। आसिफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने हमेशा पाकिस्तान का एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया और अपने काम निकल जाने के बाद उसे दरकिनार कर दिया।

उन्होंने इस 'यूज एंड थ्रो' की नीति के लिए 'टॉयलेट पेपर' शब्द का इस्तेमाल किया जिससे पाकिस्तान की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मच गई है।

'रूस के खिलाफ जंग जिहाद नहीं थी'

संसद को संबोधित करते हुए ख्वाजा आसिफ ने इतिहास के दो बड़े मोड़ों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में अफगानिस्तान में रूस (सोवियत संघ) के खिलाफ जो विद्रोह शुरू हुआ वह अमेरिका के इशारे पर था। आसिफ के अनुसार, रूस के खिलाफ वह लड़ाई जिहाद नहीं थी। उन्होंने तर्क दिया कि तत्कालीन पाकिस्तानी सरकार ने अपने निजी हितों के लिए पाकिस्तान को उस जंग में धकेल दिया जिसमें शामिल होने का कोई औचित्य नहीं था। इसके लिए उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल जियाउल हक को जिम्मेदार ठहराया।

2001 की गलती और तालिबान का दंश

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि पाकिस्तान ने दूसरी बड़ी गलती 2001 में की, जब वह अमेरिका के लिए अपने ही बनाए तालिबान के खिलाफ हो गया। इस दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका को अपना एयरस्पेस दिया, कराची पोर्ट के इस्तेमाल की इजाजत दी और अपने लोग भी दिए। आसिफ ने अफसोस जताते हुए कहा कि आज अमेरिका तो अफगानिस्तान से चला गया लेकिन पाकिस्तान आज भी उस युद्ध के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर पा रहा है। उन्होंने इसके लिए परवेज मुशर्रफ के फैसलों की भी आलोचना की।

कितना हुआ पाकिस्तान को नुकसान?

आसिफ का यह बयान हाल ही में इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर हुए आतंकी हमले के बाद आया है, जिसमें 31 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। पाकिस्तान इस हिंसा के लिए अफगानिस्तान को दोषी मानता रहा है। इस दौरान पाकिस्तान को हुए भारी नुकसान के आंकड़े भी सामने रखे गए। सूत्रों के अनुसार, 2018 में पूर्व पीएम इमरान खान ने बताया था कि इस आतंकवाद विरोधी लड़ाई में पाकिस्तान ने अपने 75,000 लोग गंवाए हैं।

आर्थिक रूप से पाकिस्तान को 123 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ, जबकि बदले में अमेरिका से सहायता के रूप में केवल 20 अरब डॉलर ही प्राप्त हुए। ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तालिबान की लड़ाई में पाकिस्तान का शामिल होना एक ऐसी गलती थी जिसकी भरपाई अब नामुमकिन है।

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