शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचा ईरानी प्रतिनिधि मंडल (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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हाथ बांधे खड़े रहे मुनीर...शान से पाकिस्तान पहुंचा ईरानी प्रतिनिधि मंडल, आज होगी अमेरिका से बातचीत- VIDEO

Islamabad Talks: इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक वार्ता होने जा रही है। 1979 की क्रांति के बाद यह सबसे बड़ी बैठक है, जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष और शांति बहाली पर चर्चा होगी।

अक्षय साहू

US-Iran Peace Talks: ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ के नेतृत्व में देर रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गया है। इस दौरान पाकिस्तान के  सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार उनका स्वागत करने के लिए खुद नूर खान एयर बेस पहुंचे। जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में यहां पहुंचेगा।

दोनों देशों के बीच होने वाली इस अहम बातचीत को “इस्लामाबाद वार्ता” नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का स्थायी समाधान निकालना है। यह वार्ता लगभग छह सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद आयोजित की जा रही है, इसलिए इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?

ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख नेता और अधिकारी शामिल हैं। गालिबाफ के साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियन और केंद्रीय बैंक के प्रमुख अब्दोलनासर हेममती भी मौजूद हैं। इसके अलावा कई सांसद, सैन्य अधिकारी और आर्थिक विशेषज्ञ भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जो विभिन्न मुद्दों पर ईरान का पक्ष रखेंगे।

1979 के बाद सबसे बड़ी बैठक

दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं, जो अमेरिकी नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह बैठक 1979 की ईरानी क्रांति 1979 के बाद दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तर की बातचीत मानी जा रही है।

लेबनान पर हमले से तनाव

हालांकि, वार्ता शुरू होने से पहले ही कुछ शर्तें सामने आ गई हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब उसकी प्रमुख मांगें पूरी होंगी। इनमें लेबनान में युद्धविराम लागू करना और ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त करना शामिल है। गालिबाफ ने कहा कि इन शर्तों को लागू किए बिना सार्थक वार्ता संभव नहीं होगी।

इस बीच, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी इस वार्ता को लेकर अनिश्चितता जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना आसान नहीं होगा, भले ही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़े। इसके अलावा इजरायल और लेबनान के बीच तनाव भी इस शांति वार्ता में एक अहम मुद्दा होने वाला है। 

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