पाकिस्तान नहीं पहुंचा ईरानी प्रतिनिधि मंडल, क्या रद्द हो जाएगा सीजफायर! शहबाज-मुनीर की बेइज्जती तय

US-Iran War: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर भ्रम के बीच ईरान ने पाकिस्तान में किसी भी बातचीत से इनकार किया है और रिपोर्ट्स को झूठा बताते हुए वार्ता फिलहाल असंभव बताई है।
US-Iran Peace Talks Halted
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता रद्द होने का खतरा (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US-Iran Peace Talks Halted: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले एक बड़ा भ्रम और विवाद सामने आया है। जहां पहले कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंच चुका है, वहीं ईरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। लेकिन ईरान की सरकारी एजेंसियों ने इन खबरों को “पूरी तरह झूठा” बताते हुए साफ किया कि दोनों नेता अभी भी तेहरान में ही मौजूद हैं और अपने सरकारी कार्यों में व्यस्त हैं।

अमेरिका के साथ किसी भी वार्ता से इनकार

ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी तस्नीम न्यूज के मुताबिक, किसी भी ईरानी टीम का पाकिस्तान जाने या वार्ता में शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं है। ईरान ने आरोप लगाया कि इस तरह की गलत सूचनाएं जानबूझकर फैलाई जा रही हैं ताकि भ्रम पैदा किया जा सके और उसकी कूटनीतिक स्थिति को कमजोर किया जाए। साथ ही ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका लेबनान में पूर्ण युद्धविराम लागू नहीं करता और इजरायल की सैन्य कार्रवाई नहीं रुकती, तब तक कोई वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी। ईरानी अधिकारियों ने दोहराया कि वे केवल स्थायी और वास्तविक समाधान चाहते हैं, न कि अस्थायी समझौते।

गालीबाफ ने अमेरिका को दी चेतावनी

इस बीच, ईरान की संसद के अध्यक्ष गालीबाफ ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजरायल के पास बहुत सीमित समय बचा है और यदि सैन्य कार्रवाई नहीं रुकी तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में बातचीत की कोई योजना नहीं है।

हालांकि ईरान ने एक तरफ बातचीत से इनकार किया है, लेकिन दूसरी तरफ उसने पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका की सराहना भी की है। पाकिस्तान लगातार इस पूरे कूटनीतिक प्रयास में एक मध्यस्थ के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बातचीत के लिए उसकी शर्तों का पूरा होना जरूरी है।

किले में तब्दील हुआ इस्लामाबाद

इस अहम संभावित वार्ता को देखते हुए इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। लगभग 10,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। सेना की निगरानी में रेड जोन और हाई सिक्योरिटी क्षेत्रों को पूरी तरह सील कर दिया गया है, और कई मुख्य मार्गों पर आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है।

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