US and Venezuela Tensions: अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ना और तेल क्षेत्र पर कंट्रोल के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा है, लेकिन भारत के लिए यह बड़ा आर्थिक अवसर बन सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अमेरिकी कंट्रोल से वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में प्रतिबंधों में ढील मिलने की उम्मीद है। इससे भारत की ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) को 1 अरब डॉलर (करीब 9000 करोड़ रुपये से अधिक) का लंबे समय से फंसा बकाया मिल सकता है। इसके साथ ही तेल उत्पादन में बढ़ोतरी से भारत को सस्ता क्रूड आयात फिर से शुरू करने का मौका मिलेगा।
भारतीय कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) की वेनेजुएला में ईस्टर्न सैन क्रिस्टोबल ऑयल प्रोजेक्ट में 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। काराबोबो-1 प्रोजेक्ट में ओवीएल की 11% और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) की 3.5% हिस्सेदारी है। वेनेजुएला की राज्य तेल कंपनी पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला एसए (PDVSA) बहुमत शेयरधारक है।
2014 तक OVL को 53.6 करोड़ डॉलर का डिविडेंड बकाया है। उसके बाद की अवधि में भी लगभग इतनी राशि फंसी हुई है। कुल मिलाकर लगभग 1 अरब डॉलर का बकाया है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका की ओर से 2020 में लगाए गए कड़े प्रतिबंध। इनके चलते तेल आयात बंद हो गया और ऑडिट की मंजूरी नहीं मिली। इससे उत्पादन में बड़ी गिरावट आई और बकाया का निपटान रुक गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला में अमेरिकी तेल कंपनियां अरबों डॉलर निवेश करेंगी। ये कंपनियां खराब इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करेंगी। ट्रंप ने कहा है कि हम तेल के कारोबार में हैं। हमें पता है कि कैसे तेल कंपनियां मुनाफे में आती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि PDVSA के पुनर्गठन और प्रतिबंधों में छूट से तेल निर्यात बहाल हो जाएगा। इससे OVL को बकाया मिलेगा। साथ ही उत्पादन बढ़ेगा। पहले भारत वेनेजुएला से रोज 4 लाख बैरल से अधिक क्रूड आयात करता था, जो प्रतिबंधों से बंद हो गया। अब निर्यात शुरू होने से भारतीय रिफाइनरियों को सस्ता हेवी क्रूड मिलेगा।
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दोनों देशों के बीच तनाव की घटना वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है। मगर, भारत पर सकारात्मक असर पड़ेगा। वेनेजुएला से तेल का मुख्य खरीदार चीन फिलहाल खरीद रोकेगा, जब तक भुगतान चैनल साफ नहीं होते। भारत के लिए यह अवसर है कि पुराने व्यापारिक रिश्ते बहाल हों और फंसा पैसा वापस लिया जाए। उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी नियंत्रण से लातिन अमेरिकी देश में स्थिरता आएगी। विदेशी निवेश बढ़ेगा, जिसका सीधा लाभ भारत को होगा।