दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

8 साल बाद दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का भारत दौरा, 'ग्लोबल साउथ' के दो बड़े दिग्गजों के मिलन पर दुनिया की नजर

India South Korea: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग रविवार से भारत की 3 दिवसीय यात्रा शुरू करेंगे। इस दौरे से आर्थिक, रक्षा और ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर दोनों देशों के संबंध और गहरे होंगे।

अमन उपाध्याय

India South Korea Relations: भारत और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग रविवार से तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आ रहे हैं। इस दौरे को रणनीतिक विशेषज्ञों द्वारा एक अहम पड़ाव माना जा रहा है क्योंकि यह केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूती देने वाला है।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'द डिप्लोमैट' के अनुसार, वर्ष 2026 को दोनों देशों के बीच 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के दूसरे दशक की एक नई और प्रभावी शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है।

लंबे अंतराल के बाद शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात

रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की पिछली राजकीय भारत यात्रा जुलाई 2018 में हुई थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2019 में दक्षिण कोरिया का दौरा किया था। इसके बाद से दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच संवाद मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय मंचों तक ही सीमित रहा है। ऐसे में यह दौरा द्विपक्षीय वार्ता के ठहराव को तोड़ने और नए लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत का उदय

दक्षिण कोरिया की यह सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है जब वैश्विक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति काफी मजबूत हुई है। भारत वर्तमान में फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। संभावना जताई गई है कि इस दशक के अंत तक भारत जापान और जर्मनी को पछाड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा। भारत ने अपने बुनियादी ढांचे में भारी निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को उदार बनाकर दुनिया भर की कंपनियों और देशों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार की छवि बनाई है।

'ग्लोबल साउथ' और रक्षा सहयोग पर जोर

दक्षिण कोरिया की वर्तमान सरकार अपनी '123 नेशनल पॉलिसी एजेंडा' के तहत 'ग्लोबल साउथ' के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रही है। भारत को ग्लोबल साउथ की सबसे प्रमुख आवाज माना जाता है, इसलिए सियोल के लिए नई दिल्ली के साथ साझेदारी करना अनिवार्य हो गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा और शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण) जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच पूरक क्षमताएं मौजूद हैं।

इन क्षेत्रों में सहयोग के जरिए न केवल वैल्यू-चेन मजबूत होगी, बल्कि दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा को भी नया आयाम मिलेगा। यह यात्रा 19 से 21 अप्रैल तक प्रस्तावित है और मौजूदा कूटनीतिक माहौल में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है।

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