BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Vladimir Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) इस साल भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह जानकारी क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक इंटरव्यू में दी। उन्होंने कहा कि पुतिन की भागीदारी लगभग तय है, हालांकि उनकी उपस्थिति अलग-अलग प्रारूपों में हो सकती है।
पेस्कोव ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं पूरी तरह 100 प्रतिशत निश्चित नहीं कह सकता, लेकिन मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) वहां मौजूद रहेंगे।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी भागीदारी वर्चुअल या प्रत्यक्ष, किसी भी रूप में हो सकती है। यह जानकारी रूसी समाचार एजेंसी TASS के हवाले से सामने आई है।
हालांकि, भारत में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तारीख और विस्तृत कार्यक्रम अभी तय नहीं किए गए हैं, लेकिन पुतिन का भारत आना लगभग निश्चित माना जा रहा है। साल 2026 में भारत इस सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जो चौथी बार होगा जब भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा। इस बार भारत 11 सदस्यीय विस्तारित ब्रिक्स समूह का नेतृत्व करते हुए ‘ग्लोबल साउथ’, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
रूसी राष्ट्रपति अगर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सम्मेलन के लिए भारत आते हैं तो यह उनका पिछले कुछ महीनों में दूसरा दिल्ली दौरा होगा। इससे पहले वो दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा की थी।
दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति, और व्यापार बढ़ाने पर चर्चा की। उस समय रूस अपनी तेल और गैस निर्यात के लिए नए बाजार तलाश रहा था, और भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा।
उनका यह दौरा समय हुआ जब रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव झेल रहा था, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच रूस एशियाई देशों, खासकर भारत, के साथ अपने संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहा था।
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रूस के अंदरूनी हालात भी चुनौतीपूर्ण थे आर्थिक प्रतिबंधों के कारण दबाव था, लेकिन सरकार ने वैकल्पिक व्यापार मार्गों और साझेदारियों पर ध्यान केंद्रित किया। इस पृष्ठभूमि में भारत दौरा रूस की “पूर्व की ओर नीति” (Pivot to Asia) का हिस्सा माना गया। कुल मिलाकर, यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।