

Trump Iran Blackmail Strait Of Hormuz: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान की धमकियां अमेरिका पर काम नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज को दोबारा बंद करके अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को 'ब्लैकमेल' करने की कोशिश कर रहा है जिसे अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान इस रणनीतिक रास्ते को वर्षों से इसी तरह ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आ रहा है लेकिन अब स्थिति वैसी नहीं है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि हालांकि तनाव चरम पर है, लेकिन संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम उनसे बात कर रहे हैं। वे जलडमरूमध्य को फिर से बंद करना चाहते हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने अमेरिका पर पूर्व में किए गए वादों और समझौतों को तोड़ने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की अड़ियल नीतियों और प्रतिबंधों के कारण ही उसने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर दोबारा सैन्य पहरा बिठाया है।
होर्मुज की खाड़ी में स्थिति केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र में अब बारूद की गंध महसूस की जा रही है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने क्षेत्र से गुजरने वाले एक भारतीय तेल टैंकर पर गोलीबारी की है। इस हिंसक घटना के बाद वहां मौजूद दो अन्य व्यापारिक जहाजों को अपनी सुरक्षा को देखते हुए तुरंत पीछे हटना पड़ा। शनिवार सुबह ईरान द्वारा जारी आधिकारिक संदेश के बाद कम से कम 20 जहाजों को अपना रास्ता बदलकर ओमान की ओर मुड़ना पड़ा है, जिससे समुद्री व्यापार ठप हो गया है।
इस तनाव का एक मुख्य केंद्र ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी है। ईरान ने घोषणा की है कि वह अमेरिका के दबाव में अपना 'संवर्धित यूरेनियम' (Enriched Uranium) वाशिंगटन को नहीं सौंपेगा, जो डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है। वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को ललकारते हुए कहा है कि उनकी सेना किसी भी हमले का जवाब 'बिजली' की तरह देगी और दुश्मन को करारी शिकस्त मिलेगी। ईरानी नेताओं ने ट्रंप के बयानों को 'झूठ' का पुलिंदा करार देते हुए बातचीत की शर्तों को खारिज कर दिया है।
होर्मुज दुनिया की तेल आपूर्ति का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। ट्रंप के सख्त तेवर और ईरान द्वारा जहाजों पर की जा रही फायरिंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी और सैन्य संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो दुनिया को अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, अमेरिकी नौसेना अपनी गश्त बढ़ा रही है और ईरान ने अपनी मिसाइलें तैनात कर रखी हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल गहरा गए हैं।