यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

अमेरिका से बढ़ी यूरोपीय संघ की दूरियां! भारत के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते की तैयारी

EU India Trade: अमेरिका और यूरोपीय संघ के बिगड़ते रिश्तों के बीच EU अब भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मान रहा है। 27 जनवरी को भारत-EU के बीच ऐतिहासिक व्यापार और रक्षा समझौता होने की संभावना है। 

प्रिया सिंह

Trump-EU Relations Tension: यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच दशकों पुराने मजबूत रणनीतिक संबंधों में अब बड़ी दरार आती दिख रही है। डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों और टैरिफ की धमकियों ने यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए नए विकल्प खोजने पर मजबूर कर दिया है। ट्रम्प-EU संबंधों में तनाव की वजह से अब दुनिया का समीकरण पूरी तरह से बदलता हुआ नजर आ रहा है। ऐसे में यूरोपीय संघ अब भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है ताकि एक स्थिर और भरोसेमंद वैश्विक साझेदारी स्थापित की जा सके।

ऐतिहासिक संबंधों का सफर

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने मार्शल प्लान के जरिए यूरोप की आर्थिक मदद कर उसके पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लंबे समय तक यूरोपीय देश अमेरिका को अपनी सुरक्षा का गारंटर मानते रहे और नाटो के जरिए दोनों पक्ष सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर एकजुट रहे। अमेरिका और यूरोप ने हमेशा से लोकतंत्र, मानवाधिकार और वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था का साझा समर्थन किया है जिससे वे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बने।

ट्रंप नीतियों से बढ़ता तनाव

हालांकि वर्तमान में राष्ट्रपति ट्रंप की 'प्रेशर पॉलिटिक्स' ने यूरोपीय संघ को अमेरिका से दूर धकेलने का काम किया है जिससे आपसी विश्वास कम हुआ है। ट्रंप द्वारा EU को टैरिफ की धमकियां देना और अपनी शर्तों पर जबरन व्यापार करने की कोशिशों ने यूरोपीय नेताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। इसके अलावा ग्रीनलैंड पर कब्जे जैसे विवादास्पद विचारों ने भी यूरोपीय देशों के मन में अमेरिका के प्रति विरोध और कड़वाहट को और अधिक बढ़ा दिया है।

भारत बना नई उम्मीद

इस बढ़ते तनाव के बीच यूरोपीय संघ अब भारत को एक स्थिर और शक्तिशाली आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहा है जो संकट के समय काम आ सकता है। 27 जनवरी का दिन भारत और EU के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक हो सकता है क्योंकि इस दिन दोनों पक्षों के बीच एक बड़े मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा बल्कि रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई ऊंचाई और मजबूती प्रदान करेगा।

सुरक्षा और नाटो का भविष्य

यूरोपीय देशों को अब यह डर सताने लगा है कि अगर अमेरिका नाटो या यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था से बाहर निकलता है तो पूरे यूरोप का रणनीतिक ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। अमेरिका की अनिश्चित नीतियों की वजह से यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अब आत्मनिर्भर बनने और नए सहयोगियों की तलाश कर रहे हैं। यही कारण है कि EU की बेचैनी बढ़ रही है और वे जल्द से जल्द भारत के साथ अपने व्यापारिक और रक्षा समझौतों को अंतिम रूप देना चाहते हैं।

वैश्विक व्यवस्था में बदलाव

दुनिया की वर्तमान राजनीतिक स्थिति में भारत अब कई देशों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है जो वैश्विक अस्थिरता के बीच संतुलन बना सकता है। ट्रंप के फैसलों ने यूएस-EU संबंधों के पुराने ऑर्डर को बदल दिया है जिससे अब एक नए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की नींव पड़ती दिखाई दे रही है। भारत और यूरोपीय संघ का यह संभावित गठबंधन आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और व्यापार की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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