डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को तानाशाह बताया (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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हां मैं हूं तानाशाह, कभी-कभी तानाशाही की जरूरत होती है; दावोस में ये क्या बोल गए डोनाल्ड ट्रंप?- VIDEO

Donald Trump in Davos: डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड में कहा कि वे एक तानाशाह हैं, लेकिन कभी-कभी दुनिया को इसकी जरूरत होती है। उनके निर्णय लगभग पूरी तरह व्यावहारिकता और कॉमन सेंस पर आधारित हैं।

अक्षय साहू

Trump Dictator Comment: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और तरीकों के विरोध में अब पूरी दुनिया में आवाज उठ रही है। वैश्विक नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ खुलकर बयान दिए हैं, और विशेष रूप से वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे देशों के प्रति अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप के व्यवहार को कई जगहों पर तानाशाही बताया जा रहा है। इस विरोध और आलोचनाओं के बीच, ट्रंप ने खुद को तानाशाह कह दिया और यह भी कहा कि कभी-कभी दुनिया को एक तानाशाह की जरूरत होती है।

स्विट्जरलैंड में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनके भाषण को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया और हमें बहुत अच्छे रिव्यूज मिले। मुझे विश्वास नहीं हो रहा है।” वहीं, आलोचनाओं का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर लोग उन्हें “भयानक तानाशाह” के रूप में देखते हैं।

‘हां, मैं एक तानाशाह हूं’

डोनाल्ड ट्रंप अपनी नीतियों की आलोचना पर कहा, “हां, मैं एक तानाशाह हूं। लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।” उनका यह बयान यह दर्शाता है कि वे अपने निर्णयों को शक्ति और नियंत्रण के नजरिए से नहीं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं। हालांकि उनके इस रुख ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने अपने निर्णयों और नीति निर्धारण के तरीके पर जोर देकर कहा कि वे किसी विचारधारा से ज्यादा व्यावहारिकता और ‘कॉमन सेंस’ से प्रेरित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके निर्णय रूढ़िवादी या उदार दृष्टिकोण पर आधारित नहीं हैं। ट्रंप के अनुसार, उनके अधिकांश फैसले लगभग 95 प्रतिशत कॉमन सेंस पर आधारित हैं, और यही उनके नेतृत्व का मूल आधार है।

ट्रंप ने जताई थी नाराजगी

इससे पहले, दावोस में ट्रंप ने स्वीकार किया था कि उनके बयानों ने दुनियाभर में तनाव पैदा किया है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को अक्सर गलत समझा जाता है। ट्रंप ने कहा कि लोगों को लगा कि वे बल का प्रयोग करेंगे, लेकिन वास्तव में ऐसा उनका उद्देश्य नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया, “मुझे बल का प्रयोग करने की जरूरत नहीं है। मैं बल का प्रयोग नहीं करना चाहता और मैं बल का प्रयोग नहीं करूंगा।” यह बयान विशेष रूप से ग्रीनलैंड को लेकर उनके रुख के संदर्भ में आया था, जिससे स्पष्ट होता है कि वे कूटनीतिक और व्यावहारिक तरीके से ही काम करने को प्राथमिकता देते हैं। 

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