पाकिस्तानी सेना (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

बलूचिस्तान में पाक सेना की क्रूरता: दो और निर्दोष नागरिकों की बेरहमी से हत्या, हो रहा मानवाधिकारों का उल्लंघन

Military Killings Balochistan: बलूच यकजहीटी कमेटी ने पाकिस्तानी सेना द्वारा नसराम बलूच और अवैस बलूच की अवैध हत्याओं का खुलासा किया है, जिससे प्रांत में जबरन गायब किए जाने और हिंसा का डर गहरा गया है।

प्रिया सिंह

Extrajudicial Killings In Balochistan Province: बलूचिस्तान की शांत वादियों में एक बार फिर बेगुनाहों के खून के छींटे पड़े हैं और वहां के परिवारों का दर्द अब पूरी दुनिया के सामने आ रहा है। पाकिस्तानी सेना पर आरोप है कि उसने दो निर्दोष नागरिकों को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के मौत के घाट उतार दिया है जिससे पूरे क्षेत्र में डर व्याप्त है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार यह बर्बरता उस अमानवीय सिलसिले का हिस्सा है जिसमें लोगों को पहले जबरन गायब किया जाता है और फिर उनकी लाशें मिलती हैं। नसराम और अवैस जैसे युवाओं की जान जाना केवल एक आंकड़े की बात नहीं है बल्कि यह एक पूरी मानवता और न्याय व्यवस्था की हार को दर्शाता है।

नसराम बलूच का संघर्ष और अंत

नसराम बलूच का शव हाल ही में मक्सीन नदी के किनारे मिला जिसके शरीर पर पाकिस्तानी सेना की दी हुई भयानक यातनाओं और गहरी चोटों के स्पष्ट निशान मौजूद थे। उन्हें 12 अक्टूबर 2023 को पहली बार गायब किया गया था और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 13 जून 2024 को छोड़ा गया लेकिन तब तक उन्हें हेपेटाइटिस हो चुका था। फिर 8 अगस्त 2024 को सुरक्षा बल उनके घर में घुसे और उनकी मां-बहन की बेरहमी से पिटाई करने के बाद उन्हें दोबारा अपने साथ ले गए जिसका अंत उनकी मौत से हुआ।

छात्र अवैस बलूच के साथ हुई दरिंदगी

बलूचिस्तान में दमन का यह क्रूर चक्र यहीं नहीं रुका क्योंकि 23 फरवरी को पंजगुर जिले से एक होनहार छात्र अवैस बलूच को उसके घर से जबरन अगवा कर लिया गया था। अपहरण के महज एक दिन बाद ही 24 फरवरी को उसका बेजान शरीर पांजगुर के सिविल अस्पताल के पास लावारिस हालत में फेंक दिया गया जिससे जनता में भारी आक्रोश है। यह घटना साबित करती है कि सुरक्षा बल अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और निर्दोष छात्रों को निशाना बनाकर उनके भविष्य और जीवन को नष्ट कर रहे हैं।

वैश्विक न्याय की मांग और भविष्य

बलूच यकजहीटी कमेटी ने इन घटनाओं को एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मामले की जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि जो लोग कानून और नागरिकों की रक्षा के लिए तैनात हैं वही आज बलूचिस्तान के आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा और खौफ बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब खामोशी तोड़कर इन मानवाधिकारों के हनन पर कड़ा रुख अपनाना होगा ताकि निर्दोष बलूच नागरिकों को न्याय मिल सके और यह अत्याचार का अंत हो सके।

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