सुरक्षाबलों के निशाने पर 300 नक्सली... छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर सर्च ऑपरेशन शुरू

Anti Naxal Operation News : सुरक्षाबलों ने देवजी व उसके सहयोगी केसा सोढ़ी के क्षेत्र में होने की सूचना पर छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर अभियान शुरू किया। रेड्डी को छोड़ सभी शीर्ष कमांडर क्षेत्र में हैं।
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सर्च ऑपरेशन चलाते सुरक्षाबल। इमेज-एआई
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Naxalism In India : लाल गलियारे के खात्मे की उलटी गिनती शुरू हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की समयसीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के अंतिम किलों को ढहाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमाओं पर छिड़े इस निर्णायक युद्ध के केंद्र में अब प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के 300 खूंखार लड़ाके और उनके चार शीर्ष कमांडर हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रडार पर उन चार केंद्रीय समिति (CC) सदस्यों को लिया है, जो दशकों से इस खूनी खेल के मास्टरमाइंड रहे हैं। इनमें शामिल हैं। मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, देवजी उर्फ कुंभा दादा (चेतन), राममन्ना उर्फ गणपति (लक्ष्मण राव) और मल्लाह राजा रेड्डी उर्फ सागर।

देवजी के छिपे होने की सूचना

खुफिया इनपुट मिले हैं कि देवजी और उसका बेहद करीबी सहयोगी केसा सोढ़ी छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के सघन जंगलों में छिपे हैं। उसके बाद मंगलवार से वहां एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक सागर (मल्लाह राजा रेड्डी) के ओडिशा में होने की संभावना है। बाकी तीन इसी सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय हैं।

गृह मंत्री का संकल्प : 31 मार्च तक 'क्लीन स्वीप'

बीते 8 फरवरी को रायपुर में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट संदेश दिया कि वामपंथी उग्रवाद (LWE) के खिलाफ लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में है। शाह ने जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास और नक्सलियों के वित्तीय नेटवर्क  पर कड़े प्रहार ने उनकी कमर तोड़ दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया कि सुरक्षा रणनीति और बेहतर आत्मसमर्पण नीति के कारण इस साल 31 मार्च से पहले नक्सलवाद का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

सुरक्षाबलों का सीधा संदेश : सरेंडर या अंत

सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सलियों के सामने दो ही रास्ते छोड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि या तो वे हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं (आत्मसमर्पण), अन्यथा अभियानों के दौरान उन्हें खत्म कर दिया जाएगा।

निर्णायक मोड़ पर जंग

रायपुर में हुई समीक्षा बैठक इस मायने में अहम है, क्योंकि यह डेडलाइन से महज कुछ हफ्ते पहले आयोजित की गई। सरकार अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक मोड में है। जंगलों की घेराबंदी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि 2026 के बाद भारत के नक्शे से 'नक्सलवाद' शब्द हमेशा के लिए मिट जाए।

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