US-EU Trade Deal Tariffs: अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक व्यापार समझौता संपन्न हुआ है, जिसे लेकर अब यूरोपीय संघ को वैश्विक स्तर पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। रूस और हंगरी सहित कई देशों के नेताओं ने इस समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने जैसा करार दिया है।
इस समझौते के तहत अमेरिका ने यूरोपीय संघ के निर्यात पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जबकि इसके बदले में EU ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 600 अरब डॉलर के निवेश और अगले तीन वर्षों में 750 अरब डॉलर की अमेरिकी ऊर्जा खरीदने का वादा किया है। खास बात यह है कि अमेरिका ने यूरोपीय वस्तुओं पर टैरिफ लगाया है, वहीं EU ने अमेरिका पर कोई जवाबी टैरिफ नहीं लगाने का फैसला किया है।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता सेबेस्टियन गोर्का ने एक मीडिया साक्षात्कार में इस समझौते को अमेरिका की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा, "यह हैरान करने वाली बात है कि पूरा यूरोपीय संघ इस तरह ट्रंप के आगे झुक गया। यह समझौता इस बात का संकेत है कि डोनाल्ड ट्रंप आने वाले 50 से 100 वर्षों तक वैश्विक दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। जो इस चीज को नहीं समझता, वो सच्चाई नहीं जानतें है।
यूरोप के कई देशों में इस समझौते की तीखी आलोचना हुई है। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने कटाक्ष करते हुए कहा, "ट्रंप ने नाश्ते में उर्सुला वॉन डेर लेयेन को खा लिया।" फ्रांस के प्रधानमंत्री फ्रांक्वा बारू ने इसे यूरोपीय संघ का अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण बताया। फ्रांस की प्रमुख विपक्षी नेता मरीन ले पेन ने इसे राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक विफलता करार दिया।
इटली ने भी इस समझौते की आलोचना की है। विपक्षी नेताओं ने इसे यूरोप की कमजोरी बताया, हालांकि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए इसे अमेरिका के साथ संबंध सुधारने की दिशा में एक कदम बताया है। यह समझौता वैश्विक राजनीति में अमेरिका की बढ़ती पकड़ और यूरोप की कूटनीतिक चुनौतियों को दर्शाता है।
रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील को लेकर यूरोप के लिए अपमानजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ ने सख्त टैरिफ से बचने के लिए यह समझौता स्वीकार किया है। मेदवेदेव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, इस डील का साफ मतलब है कि ट्रंप ने यूरोप को पूरी तरह झुका दिया है।