Priyanka Gandhi Meet Nitin Gadkari Video: संसद की गहमागहमी के बीच एक ऐसी मुलाकात हुई जिसने सबका ध्यान खींचा। वायनाड सांसद प्रियंका गांधी अपनी मांगों को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के कक्ष में पहुंचीं। महज 10 मिनट की इस छोटी सी चर्चा में काम के साथ-साथ खूब ठहाके भी लगे और लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर दिखी।
लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद कितना जरूरी है, इसकी एक बानगी संसद भवन में देखने को मिली। दरअसल, प्रियंका गांधी ने सदन के भीतर कहा था कि वह जून महीने से मंत्री जी से मिलने का समय मांग रही हैं। इस पर नितिन गडकरी ने बेहद सादगी से जवाब दिया कि उन्हें किसी औपचारिक अप्वाइंटमेंट की जरूरत नहीं है। उन्होंने खुले मन से कहा कि प्रश्नकाल के बाद आप तुरंत मेरे कक्ष में आ जाइए, हमारे दरवाजे हमेशा आपके लिए खुले रहते हैं।
जब प्रियंका गांधी अपने निर्वाचन क्षेत्र वायनाड की सड़कों की समस्या लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कक्ष में पहुंचीं, तो वहां माहौल बिल्कुल सहज था। मंत्री गडकरी ने न केवल उनकी बात सुनी, बल्कि उन्हें चावल से बनी एक विशेष डिश भी खिलाई। चर्चा के दौरान गडकरी ने मजाकिया अंदाज में एक ऐसी बात कही जो अब वायरल हो रही है। उन्होंने कहा 'आपके भाई राहुल गांधी का काम तो मैंने कर दिया है, अब अगर आपका काम नहीं करूंगा तो लोग कहेंगे कि भाई का काम तो कर दिया पर बहन का नहीं किया।' इस मजाक ने गंभीर राजनीतिक माहौल को भी खुशनुमा बना दिया।
बातचीत के दौरान गडकरी ने प्रियंका की कई मांगों पर सहमति जताई, लेकिन एक विशेष सड़क के मुद्दे पर पेंच फंस गया। वह सड़क राज्य सरकार के अधीन थी, जिसे लेकर गडकरी ने स्पष्ट किया कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आती और राज्य सरकार को ही इसे बनाना होगा। इस पर प्रियंका गांधी ने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ जवाब दिया, "कोई नहीं, राज्य में हमारी सरकार बनने वाली है, हम तब उसे खुद बनवा लेंगे।
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इस मुलाकात को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि "मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र, वायनाड से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की और उनसे अनुरोध किया कि लंबित कार्यों को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने मेरी चिंताओं को ध्यान से सुना और संबंधित अधिकारियों से अपडेट लिया। मुझे पूरी उम्मीद है कि ये जरूरी मुद्दे, जो सीधे लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालते हैं, उन पर उचित ध्यान दिया जाएगा और उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
लगभग 10 मिनट तक चली इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच की नोकझोंक काफी सुखद रही। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, जनहित के मुद्दों पर मंत्रियों और सांसदों की ऐसी सहज मुलाकातें एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी मानी जाती हैं।